जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में फिजियोथेरेपी काउंसिल के गठन की तैयारी है। मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि जल्‍द ही राज्‍य में फिजियोथेरेपी काउंसिल का गठन किया जाएगा। इसके लिए फिजियोथेरेपिस्ट को कोई आंदोलन करने या भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार काउंसिल के गठन के लिए जल्‍द ही कदम उठाएगी।

मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने कहा, फिजियोथेरेपिस्टों को भूख हड़ताल करने की जरूरत नहीं

मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल ने साेमवार को इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी के पदाधिकारियों के साथ काउंसिल के ड्रॉफ्ट पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि काउंसिल के गठन से डिग्री के बिना ही लोगों का इलाज कर रहे फर्जी डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्टों पर कार्रवाई में आसानी होगी।

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इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी ने सीएम को दिया ज्ञापन

एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान डॉ. सर्वोत्तम चौहान, सचिव डॉ. राजेश पाल, डॉ. अनिल कौशिक और डॉ. उदय यादव ने प्रदेश में अलग से फिजियोथेरेपी काउंसिल बनाने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। उन्‍होंने इस बारे में फिजियोथेरेपिस्टों के सुझावों से सीएम को अवगत कराया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि काउंसिल के गठन के लिए उन्होंने नौ सितंबर से भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा कर रखी है।

मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल से मिलने पहुंचे इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी के पदाधिकारी।

इस पर मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि प्रदेश सरकार न कभी दबाव में काम करती है और न करेगी। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी काउंसिल का गठन प्रदेश की जरूरत है और इसके लिए फिजियोथेरेपिस्ट को हड़ताल की जरूरत नहीं। प्रदेश सरकार जल्द ही काउंसिल के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसलिए फिजियोथेरेपिस्ट को परेशान होनेे की जरूरत नहीं है।

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सीएम मनोहरलाल ने कहा कि हरियाणा में फिजियोथेरेपी काउंसिल के गठन के लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा। इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद काउंसिल का गठन कर दिया जाएगा। इस काउंसिल के गठन से फिजियोथेरेपी चिकित्‍सा की गुणवत्ता में सुधार होगा और पारदर्शिता आएगी। इससे बिना डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे झाेलाछाप डॉक्‍टरों पर अंकुश लगेगा।

हरियाणा में 10 हजार फिजियोथेरेपिस्ट

प्रदेश में फिजियोथेरेपी काउंसिल के गठन से बिना डिग्री-डिप्लोमा मरीजों का इलाज कर रहे झोलाछाप पर अंकुश लगना तय माना जा रहा है। बता दें कि प्रदेश में डिग्रीधारक करीब 10 हजार फिजियोथेरेपिस्ट है, जबकि लगभग 5000 स्टूडेंट्स विभिन्न कॉलेजों में कोर्स कर रहे हैं।

 

इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी के जिला सचिव डॉ. साहिल ने बताया कि प्रदेश में जितनी संख्या डिग्री धारक फिजियोथेरेपिस्ट की है, उतने ही झोलाछाप अपनी दुकान खोलकर बैठे हैं। सस्ते इलाज के चक्कर में मरीज उनके पास पहुंच तो जाता है, लेकिन वे केस को इतना बिगाड़ देते हैं कि संभालना मुश्किल हो जाता है। काउंसिल का गठन होने से ऐसी दुकानों पर रोक लग जाएगी।

फिजियोथेरेपिस्ट की योग्यता, नाम के लिख सकते हैं डॉक्‍टर

 

किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से फिजियोथेरेपी में चार साल का डिप्लोमा करना होता है। इससे आगे कोई पढऩा चाहे तो दो साल का मास्टर डिग्री का कोर्स है। डिग्री धारक फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के पहले डॉक्टर शब्द लिख सकता है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha