राजेश मलकानियां, पंचकूला : हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में व्याप्त बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की परतें खुलने के बाद हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने काउंसिल के अध्यक्ष धनेश अदलखा, उपाध्यक्ष सोहन लाल कांसल और रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा को सस्पेंड कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की ओर से जारी आदेश में पीसी अधिनियम, 1988 के 7/7ए के तहत पुलिस स्टेशन हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो में दर्ज एफआइआर का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की गई है। आदेश में धनेश अदलखा, सोहन लाल कांसल और राजकुमार वर्मा को हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और रजिस्ट्रार के रूप में दी गई शक्ति/कर्तव्यों का प्रयोग करने से वंचित कर दिया गया है। साथ ही एचएसपीसी के रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा की रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्ति को भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। एचसीएस अधिकारी अपर सचिव, स्वास्थ्य योगेश मेहता को अब हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के दैनिक कामकाज की निगरानी करने का निर्देश दिया है। उपनिदेशक (फार्मेसी) दीपक मलिक को रजिस्ट्रार का कार्यभार सौंपा गया है। हरियाणा अगले आदेश तक वह अपने वर्तमान कर्तव्यों के अतिरिक्त परिषद के रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करेंगे।

तीन जुलाई को हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ था। मामले में गिरफ्तार उप प्रधान सोहन लाल कांसल ने भ्रष्टाचार का मास्टरमाइंड धनेश अदलखा को बताया। मामले में एक दलाल की गिरफ्तारी के बाद काउंसिल में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खुलीं। धनेश अदलखा और राजकुमार वर्मा अब भी अंडरग्राउंड हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने कई जगह छापेमारी की, लेकिन वह कहीं नहीं मिल पाए। विजिलेंस धनेश अदलखा को गिरफ्तार कर उनसे फार्मेसी लाइसेंस रजिस्ट्रेशन के लिए ली गई रिश्वत के रुपयों की वसूली करना चाहती है। सोहन लाल कांसल ने रिमांड के दौरान खुलासा किया था कि उसने रिश्वत के रुपये धनेश अदलखा को भी दिए हैं। धनेश अदलखा और राजकुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। दोबारा प्रधान बनने के बाद नहीं हुई थी अधिसूचना जारी

धनेश अदलखा के दोबारा प्रधान बनने पर कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई थी। धनेश अदलखा ने अपने निर्वाचित सदस्य पद से त्यागपत्र दे दिया था और 17 नवंबर 2020 को सरकार ने उन्हें सदस्य मनोनीत कर दिया। धनेश अदलखा के त्यागपत्र के बाद उन्हें दोबारा प्रधान बनाने के लिए कोई बैठक नहीं हुई। पूर्व प्रधान केसी गोयल, सदस्य बीबी सिगल, अरुण पराशर ने बताया कि धनेश अदलखा के साथ छह सदस्य मनोनीत हुए थे। मनोनीत सदस्यों के कार्यभार ग्रहण के लिए एक बैठक हुई थी। अदलखा को प्रधान बनाने के लिए बैठक नहीं बुलाई। मनोनीत सदस्यों के कार्यभार ग्रहण वाले दिन की प्रोसिडिग में हेरफेर करके हमारे हस्ताक्षरों पर बची जगह एक लाइन डाल ली थी कि धनेश अदलखा दोबारा प्रधान चुन लिए गए। हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद के सदस्य के रूप में नामित होने के बाद 17 नवंबर 2020 के बाद धनेश अदलखा के अध्यक्ष के रूप में कभी अधिसूचित नहीं किया गया। राज्य सरकार के अनुसार धनेश अदलखा को 17 नवंबर 2020 के बाद से अध्यक्ष, हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है, इसलिए तब से अध्यक्ष के रूप में अवैध तौर पर काबिज है। सोहन लाल को राज्य सरकार कह ओर से छह मार्च 2019 के बाद न तो अध्यक्ष के रूप में और न ही उपाध्यक्ष के रूप में अधिसूचित किया गया था। हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद नियम 1951 (नियम 141) के अनुसार, बैंक के सभी चेक पर हस्ताक्षर अध्यक्ष या रजिस्ट्रार करते हैं, लेकिन धनेश अदलखा ने यह पावर रजिस्ट्रार की बजाय अपने और सोहन कंसल के पास ही रखी हुई थी। रजिस्ट्रार को फार्मेसी अधिनियम और हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद नियम 1951 के अनुसार कार्य करने की अनुमति नहीं दी।

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