जासं, पंचकूला/रायपुररानी :

दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन के तबलीगी जमात का मरकज मामला सामने आने के बाद पंचकूला में भी हड़कंप मच गया है। हाल ही में मुंबई से जमात में शामिल होकर लौटे 38 लोगों को नाडा साहिब में बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में भर्ती करवाया गया है। लगभग चार महीने पूर्व मुंबई में आयोजित जमात में गांव रैहणा से 9 लोग गए थे। उनकी दो दिन पहले गांव में वापसी होने की सूचना मिलने पर प्रशासन चौकन्ना हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस व रायपुररानी अस्पताल से इमरजेंसी टीम को भेज सभी की थर्मोस्कैनर मशीन से जांच कर उन्हें नाडा साहिब स्थित आइसोलेशन सेंटर में शिफ्ट करवाया।

मामले में सवाल उठा रहे हैं कि कोरोना महामारी के चलते जब सभी राज्यों की सीमाएं सील कर दी गई हैं तो इसके बावजूद यह ग्रामीण बिना किसी मेडिकल चेकअप के गांव रैहणा कैसे पहुंच गए।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार गांव रैहणा निवासी इर्शाद, रजाक मोहम्मद, इशरान, मुनीर, नवाब, सुक्खा उर्फ इस्माइल, जमील खान, अकरम, कामिल मोहम्मद एक दिसंबर को गांव रैहणा से गए थे। वे 22 मार्च को ट्रेन से अंबाला पहुंचे। इसके बाद वे नारायणगढ़ क्षेत्र के गांव राउमाजरा व वासलपुर में रुके रहे। वहीं बिना कोई जानकारी दिए 29 मार्च की रात वे गांव रैहणा में पहुंच गए, लेकिन स्थानीय पुलिस से लेकर जिला प्रशासन तक किसी को इसकी सूचना नहीं दी गई। यहां आकर इनमें से किसी ने भी अपना मेडिकल चेकअप नहीं करवाया। हालांकि गांव के सरपंच आलमगीर ने बताया कि जमात से आए सभी लोगों को फिजिकल डिस्टेंसिंग के बारे में जागरूक करते हुए अलग रहने की हिदायत दी गई थी।

इसी तरह कालका के अंतर्गत पड़ने वाले गांव बिनाई खुदाबक्श में 29 लोग भी महाराष्ट्र में आयोजित तबलीगी जमात से वापस लौटे थे। उन्हें भी नाडा साहिब के सेंटर में भर्ती करवाया गया है। इन सभी के सेंपल लिए जा रहे हैं।

Posted By: Jagran

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