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'पेंशन कोई सरकारी कृपा या अनुग्रह राशि नहीं', 21 साल देश की सेवा करने वाले जवान को हाई कोर्ट से राहत

Published: Mon, 26 Oct 2026 04:26 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक विनोद कुमार की दिव्यांगता पेंशन 20% से बढ़ाकर 50% करने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा है।

सेना के जवान को हाई कोर्ट से राहत। सांकेतिक फोटो

सेना के जवान को हाई कोर्ट से राहत। सांकेतिक फोटो

HighLights

  1. पूर्व सैनिक विनोद कुमार की दिव्यांगता पेंशन बढ़ी।

  2. हाईकोर्ट ने 50% पेंशन का आदेश बरकरार रखा।

  3. पेंशन को पात्र व्यक्ति का अधिकार बताया।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। देश की सुरक्षा में 21 साल से अधिक समय तक सेवा देने वाले पंचकूला निवासी पूर्व सैनिक विनोद कुमार को दिव्यांगता पेंशन के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उनकी पेंशन 20 प्रतिशत दिव्यांगता के आधार पर तय थी, लेकिन सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने इसे 50 प्रतिशत के आधार पर देने का आदेश दिया था।

केंद्र सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पेंशन के बकाया भुगतान को भी तीन साल तक सीमित करने की मांग की। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार की दोनों दलीलों को स्वीकार नहीं किया और न्यायाधिकरण का आदेश बरकरार रखा। अदालत के इस फैसले से पूर्व सैनिक के दिव्यांगता पेंशन संबंधी दावे को राहत मिली है।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने मामले का निपटारा किया। विनोद कुमार 30 नवंबर, 2010 को सेना से सेवामुक्त हुए थे। उस समय वह 21 साल से अधिक की सेवा पूरी कर चुके थे।

दिव्यांगता पेंशन को बढ़ाने का आदेश

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ ने 11 मार्च, 2026 को उनकी दिव्यांगता पेंशन को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत के स्तर पर निर्धारित करने का लाभ देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि विनोद कुमार की चिकित्सकीय जांच में रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारी के कारण दिव्यांगता 20 प्रतिशत आंकी गई थी।

चिकित्सा बोर्ड ने इसे न तो सैन्य सेवा से संबंधित माना था और न ही सैन्य सेवा के कारण बढ़ा हुआ बताया था। इसी आधार पर सरकार ने न्यायाधिकरण के आदेश को गलत ठहराया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर माना कि न्यायाधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है।

पेंशन कोई सरकारी कृपा या अनुग्रह राशि नहीं

केंद्र सरकार ने दावा किया था कि देरी से याचिका दायर किए जाने के कारण बकाया भुगतान केवल पिछले तीन वर्षों तक सीमित होना चाहिए। कोर्ट ने एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन कोई सरकारी कृपा या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि पात्र व्यक्ति का अधिकार है। सरकार अपनी नीति और न्यायिक फैसलों के तहत देय दिव्यांगता पेंशन के बकाया को मनमाने ढंग से सीमित नहीं कर सकती।

खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार न्यायाधिकरण के आदेश में ऐसी कोई कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं दिखा सकी, जिसके आधार पर उसमें हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने विनोद कुमार को पिछली तारीख से 20 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत के आधार पर दिव्यांगता पेंशन और बकाया देने के आदेश को बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी।