चंडीगढ़ [बरींद्र सिंह रावत]। दावा हरियाणा में 80 से अधिक सीटें जीतने का, लेकिन राजनीति के मैदान में सबकी अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग। कोई साइकिल यात्रा निकाल रहा है तो कोई जनक्रांति रथ में सवार होकर अपनी ताकत दिखाने में लगा हुआ है। हरियाणा कांग्रेस के धुरंधरों के रथ अलग-अलग दिशा में भाग रहे हैं। इन धुरंधरों में होड़ अपनी ताकत से पार्टी हाईकमान के सामने अपना कद बड़ा करने की है।

अंतरकलह से जूझ रही कांग्रेस सत्ता का सपना संजोए हुए है, लेकिन यह तब तक हकीकत में नहीं बदल सकता जब तक कि कांग्रेस एकजुट न हो। हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर हरियाणा बचाओ परिवर्तन लाओ साइकिल यात्रा का चौथा चरण सोनीपत में 21 से 24 अगस्त तक शुरू कर रहे हैं।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा 9 सितंबर से कुरूक्षेत्र में अपना जनक्रांति रथ घुमाने जा रहे हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला भी पीछे नहीं हैं। वह भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनचेतना रैलियां आयोजित कर रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस की चौथी प्रमुख नेत्री कुमारी सैलजा चुपचाप देख रही हैं कि उंट किस करवट बैठेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा जाटलैंड की 15 सीटों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने हरियाणा की राजनीति में सीधे-सीधे जाट और गैर जाट को मुद्दा दिया है। हरियाणा कांग्रेस में सभी नेता पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ अपनी नजदीकी को कैश करने की होड़ में हैं। कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर जहां खुद को राहुल गांधी के खास समझते हैं, वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला भी पार्टी प्रवक्ता के रूप में अपना कद अन्य नेताओं से बड़ा समझते हैं।

अशोक तंवर खेमा इस बात पर भी इतरा रहा है कि राहुल गांधी ने सभी प्रदेशों के पार्टी अध्यक्षों को अपने पद पर नई व्यवस्था तक बने रहने को कहा हुआ है। वहीं, कुमारी सैलजा को सोनिया गांधी के साथ अपनी नजदीकियों पर भरोसा है।

तंवर के बयान से परहेज

हरियाणा कांग्रेस के बड़े नेताओं को यह स्वीकार नहीं है कि पार्टी चुनाव से पहले सीएम पद पर किसी को प्रोजेक्ट नहीं करेगी। इसका सबसे अधिक विरोध हुड्डा खेमे द्वारा किया जा रहा है। हरियाणा कांग्रेस प्रेसिडेंट अशोक तंवर ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कान्फ्रेंस में घोषणा की थी कि विधानसभा चुनाव से पहले सीएम कौन बनेगा इसकी घोषणा नहीं की जाएगी।

एकजुटता के बिना जीत नहीं

हरियाणा में विधानसभा चुनावों में उंट किस करवट बैठेगा यह तो अभी कोसों दूर है लेकिन यह तय है कि कांग्रेस के 80 से अधिक सीटें जीतने के दावे तब तक सच नहीं हो सकते जब तक की पार्टी के सभी नेता और गुट एकजुट नहीं हो जाते और एक कॉमन लीडरशिप के बैनर तले चुनाव लड़ें।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: Kamlesh Bhatt