चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला अपने जज्‍बे से लोगों खासकर शिक्षा से वंचित लोगों के लिए अनुपम उदारहण बन गए हैं। 86 साल की उम्र में भी पढ़ाई के प्रति उनका लगाव बड़ी सीख और प्रेरणा देता है। दरअसल जेल में करीब साढ़े नौ सजा काटने के दौरान उन्‍होंने खाली समय में पढ़ाई की और पहले 10वीं की परीक्षा पास की और अब 12वी की परीक्षा दी है। 12वीं के रिजल्‍ट में 10वीं में अंग्रेजी का पेपर न देने की बाधा आई तो वह परीक्षा भी दी है। चौटाला का यहीं नहीं थमने का इरादा नहीं है। 12वीं का रिजल्‍ट आने के बाद वद स्‍नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई भी करेंगे।

हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर सिरसा जिले के डबवाली उपमंडल में एक नामचीन गांव है चौटाला। करीब 20 हजार की आबादी होगी। नजर मारो तो दूर-दूर तक खेत-खलिहान दिखाई पड़ते हैं। आठ किलोमीटर के दायरे में फैले इस गांव में दो खेल स्टेडियम, दो बैंक, एक अस्पताल, एक आइटीआइ और तीन स्कूल इसके वीआइपी होने की कहानी कह रहे हैं। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वीन्स बैटन रिले चौटाला गांव से होकर गुजरी थी। ताऊ के नाम से मशहूर पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल और उनके सबसे बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला इसी गांव की देन हैं। देवीलाल के पूर्वज 1919 में राजस्थान से आकर यहां बस गए थे।

पिता देवीलाल के साथ शुरू की राजनीति, पांच बार सीएम रहे, राज चलाने में कभी बाधा नहीं रही कम पढ़ाई

देवीलाल ने दो बार तो उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने पांच बार हरियाणा की सत्ता संभाली। अपनी जिंदगी के 86 बसंत देख चुके चौटाला के यूं तो सुíखयों में रहने की कई वजह हैं, लेकिन इस बार चौटाला अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियों में आए हैं। एक जनवरी 1936 को जन्मे चौटाला को उनके पिताजी ओम कहते थे।

ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया के गुरुकुल में रहते थे, वहां शुरुआती पढ़ाई की, पेड़ के नीचे बैठकर नहाते थे

ओम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई चौटाला गांव से साढ़े तीन किलोमीटर दूर ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया में की। सीमा के लिहाज से संगरिया राजस्थान का इलाका है। उन दिनों पानी की बहुत किल्लत थी। आने-जाने के साधन भी पर्याप्त नहीं थे। चौटाला इस विद्यापीठ के हास्टल में रहते थे। तब पानी बचाने के लिए विद्यापीठ के सभी बच्चों को पेड़ों के नीचे बैठकर नहाने के लिए कहा जाता था।

नहाना भी हो जाता था और पेड़ों को पानी भी मिल जाता था। आठवीं की पढ़ाई चौटाला ने डबवाली के हाईस्कूल में की। अब सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनचुका है। उस समय इतनी ही पढ़ाई को पर्याप्त मान लिया जाता था। राजनीतिक परिवार से होने के कारण चौटाला अपने पिता देवीलाल के साथ शुरू से ही पालिटिक्स में सक्रिय रहे। तब उन्हें आगे पढ़ाई की खास जरूरत भी महसूस नहीं हुई।

शिक्षा से वंचित लोगों के लिए उदाहरण बने चौटाला 12वीं का रिजल्ट घोषित होते ही करेंगे स्नातक की पढ़ाई

चौटाला पहली बार दो दिसंबर 1989 को हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। उनसे अधिक बार आज तक कोई हरियाणा का मुख्यमंत्री नहीं रहा। 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद चौटाला ने अपनी राजनीतिक विरासत की पगड़ी छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला के सिर पर रख दी। उन्होंने हाल ही में सिरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में 10वीं क्लास का अंग्रेजी का पेपर दिया है।

12वीं की परीक्षा ओपन बोर्ड से दी थी, लेकिन रिजल्ट बोर्ड ने यह कहते हुए रोक लिया था कि चौटाला 10वीं की अंग्रेजी की परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुए थे। 12वीं का रिजल्ट घोषित कराने के लिए चौटाला ने दोबारा फार्म भरा और 10वीं की अंग्रेजी की परीक्षा दी। हाथ में फ्रैक्चर था, इसलिए बोर्ड ने उन्हें मलकीत नाम की नौवीं क्लास की एक लड़की को राइटर के तौर पर उपलब्ध करा दिया। चौटाला को उम्मीद है कि 10वीं क्लास के अंग्रेजी के पेपर में भरपूर नंबर आएंगे। बोर्ड का नियम है कि जब तक 10वीं क्लीयर (पास) न हो, तब तक 12वीं का परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता।

परिस्थितियां चाहें कोई भी रही हों, चौटाला के चेहरे पर हमेशा मुस्कान देखी जा सकती है। चौटाला जब 10वीं की परीक्षा देने सिरसा के सेंटर पर गए तो सहज ही मन में सवाल उठा कि आखिर इस उम्र में उन्हें परीक्षा देने की क्या जरूरत थी? न तो मुख्यमंत्री पद के लिए और न ही विधायक या सांसद बनने के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की जरूरत है, जिसे चौटाला पूरी करना चाहते हैं।

सवाल यह भी उठा कि जो चौटाला पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने आइएएस और आइपीएस अधिकारियों के साथ कैसे राज चलाया होगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि पढ़े-लिखे अफसर चौटाला की कम पढ़ाई का फायदा उठाते रहे होंगे? इन तमाम सवालों के जवाब चौटाला से जाने तो राज चलाने में उनकी पारखी-पैनी नजर और पिता के साथ बिताए समय का अनुभव काम आया।

अब स्नातक की तैयारी करने को आतुर ओमप्रकाश चौटाला

चौटाला का 12वीं क्लास का रिजल्ट अगले कुछ दिनों में घोषित होने वाला है। इसके बाद भी चौटाला अपनी पढ़ाई का सफर जारी रखने का इरादा रखते हैं। चौटाला रिजल्ट घोषित होते ही ओपन बोर्ड से ग्रेजुएशन (स्नातक) की पढ़ाई की शुरुआत करेंगे। इस उम्र में चौटाला ने पढ़ाई कर उन नौजवानों और लोगों को बड़ा संदेश दिया है, जिन्होंने अपने जीवन में कभी पढ़ाई-लिखाई को महत्व नहीं दिया।

चौटाला बताते हैं, राज चलाते हुए मुझे कोई परेशानी नहीं आई। मुझे अंग्रेजी भी आती है और हिंदी भी बढि़या है। पंजाबी भी जानता हूं। हर किसी फाइल को पढ़ने और समझने के बाद ही अप्रूव करता था। उस समय न तो मेरे पास समय था और न ही जरूरत पड़ी। अब जेल में रहा तो सारा समय खाली रहता था। मन में विचार आया कि क्यों न 10वीं की पढ़ाई पूरी कर लूं। मन लगाकर पढ़ा।

वह कहते हैं, ' जेल में अखबार, मैगजीन और अपनी किताबों के पढ़ने के अलावा दूसरा कोई काम नहीं था। पढ़ाई के अलावा दूसरी किताबें भी खूब पढ़ी। अब भी पढ़ता रहता हूं। कभी खाली नहीं बैठता। इसी तरह 12वीं हो गई। अब जेल से बाहर आ चुका हूं तो आगे स्नातक की पढ़ाई करने की इच्छा है, ताकि कोई यह न कह सके कि हरियाणा का पांच बार सीएम रहा व्यक्ति आठवीं पास था।'

बरगला नहीं सकते थे आइएएस और आइपीएस अधिकारी

ओमप्रकाश चौटाला के ओएसडी रहे तत्कालीन रिटायर्ड आइएएस अधिकारी आरएस चौधरी बताते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। 86-87 की उम्र में चौटाला हर किसी के लिए प्रेरणा हैं। चौटाला जब मुख्यमंत्री थे, तब अधिकारियों से नियमित ब्रीफिंग लेते थे। पूरे प्रदेश में घूमने की वजह से हर समस्या तथा सामाजिक व राजनीतिक पहलू से वाकिफ थे। राज चलाने में यही तुजुर्बा काम आया। कोई उन्हें बरगला नहीं सकता था। अपने अनुभव और योग्यता तथा लोकप्रियता की बदौलत ही चौटाला सात बार एमएलए और पांच बार सीएम बने।

उन्होंने तीन उपचुनाव भी जीते। यही खासियत उनके छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला की है। चौटाला के छोटे भाई भाजपा सरकार में बिजली व जेल मंत्री रणजीत चौटाला कहते हैं कि भाई साहब की हर विषय-मसले पर अच्छी पकड़ थी। उन्होंने इस उम्र में पढ़ाई कर पूरे देश के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।

चौटाला गांव ने इस बार विधानसभा को दिए पांच विधायक

चौटाला गांव राजनीतिक रूप से बहुत ही ज्यादा उर्वरा है। इस बार की विधानसभा में चौटाला गांव से ताल्लुक रखने वाले देवीलाल परिवार के पांच विधायक सदन में गए। देवीलाल के पोते अभय सिंह चौटाला तीन कृषि कानूनों के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं और प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं।

ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय सिंह की पत्नी नैना चौटाला और पुत्र दुष्यंत चौटाला भी इस बार विधायक बने हैं। दोनों भाजपा सरकार में साझीदार हैं। चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह रानियां से निर्दलीय विधायक चुनकर सरकार में बिजली व जेल मंत्री हैं। कांग्रेस के टिकट पर इसी परिवार के डा. केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग डबवाली से विधायक हैं।

Edited By: Sunil Kumar Jha