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पंचकूलावासियों के लिए बड़ी राहत, 120 करोड़ से बदलेगा सीवरेज नेटवर्क, 50 साल तक नहीं खोदनी पड़ेंगी सड़कें

Published: Sun, 25 Oct 2026 07:00 AM (IST)

पंचकूला में 120 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे अगले 50 सालों तक सड़कें ...और पढ़ें

स्टॉर्म वाॅटर ड्रेनेज एवं सीवर नेटवर्क को किया जाएगा अपग्रेड।

स्टॉर्म वाॅटर ड्रेनेज एवं सीवर नेटवर्क को किया जाएगा अपग्रेड। 

HighLights

  1. 120 करोड़ से 207 किमी सीवरेज नेटवर्क का आधुनिकीकरण।

  2. स्मार्ट सेंसर, आरसीसी लाइनिंग से जलभराव की रोकथाम।

  3. 50 साल तक सड़कों की खोदाई से मिलेगी मुक्ति।


जागरण संवाददाता, पंचकूला। मानसून में सड़कों पर जलभराव, घरों के बेसमेंट में पानी घुसने और जमीन धंसने जैसी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए पंचकूला में सीवरेज नेटवर्क को आधुनिक बनाने की योजना तैयार की गई है।

नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की संयुक्त पहल के तहत करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉर्म वाॅटर ड्रेनेज एवं सीवर नेटवर्क को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। इसके तहत शहर में करीब 207 किलोमीटर लंबे नेटवर्क को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जाएगा, ताकि आने वाले दशकों में सीवरेज और बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।

शहर के कई हिस्सों में दशकों पुरानी ईंटों से बनी नालियों और सीवर लाइनों के कारण पानी की निकासी प्रभावित होती है। बरसात के दौरान पानी भरने से सड़कों को नुकसान पहुंचता है और कई बार घरों के बेसमेंट तक पानी पहुंच जाता है। प्रस्तावित परियोजना में इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

आरसीसी लाइनिंग से मजबूत होंगी सड़कें

परियोजना के तहत सेक्टर-6, 7, 8, 10 और 12 सहित विभिन्न क्षेत्रों की सड़कों के नीचे आरसीसी लाइनिंग की जाएगी। इससे पुरानी नालियों और सीवर नेटवर्क को मजबूती मिलेगी तथा मिट्टी के कटाव और सड़क धंसने की आशंका कम होगी। योजना का उद्देश्य बार-बार खुदाई और मरम्मत पर होने वाले खर्च को कम करना भी है।

चार प्रमुख तकनीकों से बदलेगा नेटवर्क

नई व्यवस्था में समानांतर ड्रंक सीवर लाइनों, सॉलिड वेस्ट ट्रैप, स्मार्ट सेंसर मानिटरिंग और रिचार्ज वेल जैसी तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। मुख्य सड़कों के किनारे 1200 से 1800 मिलीमीटर व्यास की भारी आरसीसी ड्रंक लाइनें बिछाई जाएंगी।

इससे बड़े क्षेत्र से सीवरेज के प्रवाह को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। साॅलिड वेस्ट ट्रैप के माध्यम से प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरे को सीवर नेटवर्क में जाने से रोकने की योजना है।

वहीं, संवेदनशील इलाकों में वाटर-लेवल सेंसर लगाने से पानी का स्तर बढ़ने पर अलर्ट मिल सकेगा। इससे संबंधित विभाग समय रहते कार्रवाई कर सकेंगे। इसके अलावा रिचार्ज वेल के माध्यम से बरसाती पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर सुधारने पर भी जोर दिया जाएगा।

सेक्टरों और गांवों में होंगे अलग-अलग कार्य

योजना के तहत सेक्टर-19 के रेलवे अंडरपास के पास 100 एचपी क्षमता का आटोमैटिक पंपिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। सेक्टर-1 और 2 की डिवाइडिंग रोड पर बारिश के तेज बहाव को रोकने के लिए क्रॉस-कल्वर्ट बनाया जाएगा।

सेक्टर-12 और 14 के बैक-बाक्स क्षेत्रों में भी आवश्यक पाइपलाइन और इंजीनियरिंग कार्य किए जाएंगे। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में मलबे व सिल्ट को रोकने के लिए आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। वहीं, माता मनसा देवी कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में सुखना चौक तक अपग्रेडेड ग्रेविटी ड्रेन लाइन का विस्तार करने की योजना है।

जलभराव से राहत और भूजल संरक्षण पर जोर

परियोजना का प्रमुख उद्देश्य बरसात के दौरान जलभराव कम करना, सीवर ओवरफ्लो रोकना और सड़कों को बार-बार क्षतिग्रस्त होने से बचाना है। इससे मरम्मत पर होने वाले खर्च में कमी आने के साथ शहर की जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित कार्यों का वास्तविक लाभ परियोजना की मंजूरी, समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगा। योजना के लागू होने से पंचकूला में सीवरेज और बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।