पंचकूला, जागरण संवाददाता: नगर निगम की ओर से पिटबुल और राटविलर पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ डाग लवर्स ने नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। पार्षद अक्षयदीप चौधरी ने कहा कि नगर निगम की बैठक में पिटबुल और राटविलर कुत्तों पर प्रतिबंध लगाने का एजेंडा नहीं था, लेकिन मौके पर बैठक में यह प्रस्ताव ला दिया गया, जिसके कारण सोचने का मौका नहीं मिला।

पिटबुल और राटविलर रखने वाले मालिकों को आसपास के लोगों से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जब इन कुत्तों को प्रतिबंधित करने का फैसला ले लिया था, तो कमेटी के सदस्यों से सलाह क्यों नहीं की गई? लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए था। जिनके पास पहले से इस नस्ल के कुत्ते हैं, वह इनका क्या करें उसकी भी जानकारी दी जानी चाहिए थी।

डाग लवर मीनाक्षी महापात्रा ने कहा कि कानून में किसी भी तरह से इन नस्ल के कुत्तों पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रविधान नहीं है। यदि इन्हें पेराफेरी के बाहर छोड़ा जाएगा, तो वहां भी यदि यह खतरनाक है, तो उन लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने कुत्ते बेचने का कारोबार चला रखा है, जो ब्रीडिंग करवाने के बाद कुत्तों के बच्चों को आगे बेच देते हैं।

नगर निगम ने कोई सर्वे नहीं करवाया गया। लीगल ब्रीडर्स का कोई लाइसेंस दिया है। अवैध तौर पर इन नस्ल के कुत्तों की ब्री¨डग करवाने वालों पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव कुंडी में एक व्यक्ति रहता है, जो इस नस्ल के कुत्तों की ब्री¨डग करवाने का काम करता है। 20 से 25 कुत्ते उसके पास हैं। इस नस्ल के कुत्तों की ब्री¨डग करवाने के बाद उन्हें आगे बेच देता है। ऐसे लोगों पर रोक लगनी चाहिए।

नगर निगम के पास आठ पिटबुल सहित 410 कुत्तों का रजिस्ट्रेशन मेयर कुलभूषण गोयल ने कहा कि नागरिक अस्पताल में लगातार कुत्तों से काटने के मामले बढ़ रहे थे। पिछले छह महीने में 3100 से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले आए हैं।

पिटबुल और राटविलर पर नगर निगम की बैठक में सर्वसम्मति से पास कर प्रतिबंधित किया है। नगर निगम के पास अब तक 410 कुत्ते रजिस्टर्ड हुए हैं, जिसमें से आठ पिटबुल हैं।

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