जागरण संवाददाता, पंचकूला : पंचकूला के एसीएस (एसडी) कंवल कुमार की अदालत ने लावारिस पशुओं पर एडवोकेट पंकज चादगोठिया की जनहित याचिका पर हरियाणा के मुख्य सचिव, डीसी पंचकूला, महापौर और आयुक्त नगर निगम और डीजीओपी हरियाणा को नोटिस जारी किया है। लावारिस पशुओं पर सभी प्रतिवादियों को 5 सितंबर 2018 तक जवाब देने के लिए कहा गया है। नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत दायर अपनी याचिका में चादगोठिया ने कहा कि सार्वजनिक उपद्रव के रूप में पशु भटक रहे हैं। पंचकूला में आने वाले लोगों को विभिन्न कमियों और लापरवाही के कारण दुर्घटनाओं का खतरा है। नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी उत्तरदायी हैं। सबसे बड़ा खतरा लावारिस पशु हैं। गाय, भैंस, साड, आवारा कुत्तों जैसे सभी जानवरों से पंचकूला की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को मुक्त करना जरूरी है। लावारिस पशु अकसर व्यस्त सड़कों के बीच में बैठे या चलते रहते हैं, जिससे अचानक वाहनों से टकराने का खतरा रहता है और परिणामस्वरूप चोटें, मौत, वाहनों को नुकसान पहुंचता है। इस बारे में मीडिया द्वारा कई बार हाईलाइट किया गया है, लेकिन संबंधित अधिकारी गंभीर नहीं हैं। चादगोठिया ने तर्क दिया कि मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न कार्यकर्ताओं के बीच कोई उचित एजेंसी ने समन्वय नहीं बनाया है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन, नगरपालिका/निगम और पुलिस समेत सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष सेल बनाया जाना चाहिए। बता दें कि अधिकारी पशु लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर कार्रवाई कर सकते हैं। चांदगोठिया ने मुआवजे की नीति भी मागी है, जिसमें प्रशासन को किसी भी प्रभावित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति करने के लिए मुआवजा मिले। पुलिस को ऐसे हर मामले में प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए। चांदगोठिया ने 26 अप्रैल को अधिकारियों को कानूनी नोटिस भी दिया था। अधिकारियों ने यह भी दावा था किया कि पंचकूला 15 अगस्त, 2018 तक लावारिस मवेशियों से मुक्त होगा। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो चादगोठिया को प्रतिवादी के खिलाफ कार्रवाई की माग करने के लिए याचिका दायर करने को मजबूर होना पड़ा है।

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