पंचकूला में सिलिंडरों के लिए मारामारी; आधी रह गई सप्लाई, हजारों उपभोक्ता परेशान, कालाबाजारी के आरोप
पंचकूला में रसोई गैस की किल्लत गंभीर हो गई है, जहां प्रतिदिन 3500 सिलिंडरों की मांग के मुकाबले केवल 1500 ...और पढ़ें

घर के सारे काम छोड़कर सिलिंडरों के लिए लाइन में लगी महिलाएं व युवतियां।
HighLights
प्रतिदिन करीब 3500 सिलिंडरों की मांग रहती।
अब 1500 सिलिंडर ही वितरित हो पा रहे।
लोगों ने की प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। शहर में रसोई गैस की किल्लत दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। बुकिंग के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे। हालात यह हैं कि रोजाना हजारों लोग गैस से वंचित रह रहे हैं।
पंचकूला शहर और आसपास के क्षेत्रों- बरवाला, रामगढ़, रायपुररानी और एचएमटी में प्रतिदिन करीब 3500 सिलिंडरों की मांग रहती है, लेकिन अब 1500 सिलिंडर ही वितरित हो पा रहे हैं। प्रतिदिन करीब 2000 उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
गैस की कमी के चलते उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई लोग सुबह से ही सिलिंडर लेने के लिए लाइन में लग जाते हैं, लेकिन शाम तक भी उन्हें गैस नहीं मिल पाती। काॅलोनियों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
गैस संकट का असर होटल, ढाबा और छोटे फूड कारोबारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई संचालक अब डीजल भट्ठी और इंडक्शन चूल्हों का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है और मुनाफा घट रहा है।
कुछ उपभोक्ताओं ने गैस वितरण प्रणाली में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसियां सीमित गाड़ियां भेज रही हैं और कई बार संदिग्ध तरीके से पर्चियां बांटी जाती हैं। आरोप यह भी हैं कि बाद में सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं।
एजेंसियों ने सप्लाई कम मिलने की बताई वजह
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें कंपनियों से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि सप्लाई सामान्य होते ही समस्या का समाधान हो जाएगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सुचारु किया जाए और यदि कहीं कालाबाजारी हो रही है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।
