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पंचकूला में कढ़ी-चावल बेचने वाले ने की करोड़ों का ठगी, बन बैठा आलीशान फार्महाउस और लग्जरी कारों का मालिक

Published: Thu, 08 Oct 2026 02:17 PM (IST)

पंचकूला में कढ़ी-चावल बेचने वाले राजेश उर्फ नाना ने ऑनलाइन निवेश का झांसा देकर लोगों से 8 करोड़ रुपये से ...और पढ़ें

करोड़ों के ऑनलाइन निवेश घोटाले में आरोपित सलाखों के पीछे। (सांकेतिक फोटो)

करोड़ों के ऑनलाइन निवेश घोटाले में आरोपित सलाखों के पीछे। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. 7,500 रुपये से शुरू किया निवेश।

  2. आठ करोड़ से अधिक की ठगी का खुलासा।

  3. घोटाले का पर्दाफाश, आरोपित गिरफ्तार।

जागरण संवाददाता, पंचकूला। कढ़ी चावल की रेहड़ी लगाने वाले राजेश उर्फ नाना ने ऑनलाइन निवेश का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। साइबर क्राइम पुलिस की जांच में कथित तौर पर आठ करोड़ रुपये से अधिक के निवेश घोटाले का खुलासा हुआ है।

पुलिस के अनुसार फर्जी एप और क्रिप्टो स्कीमों के जरिए लोगों को निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा दिया गया। इस फर्जीवाड़ा करके रेहड़ी से उठ कर लग्जरी कारों और आलीशान फार्महाउस तक पहुंच गया।

हालांकि राजेश इन दिनों करोड़ों रुपये के ऑनलाइन निवेश घोटाले के मामले में सलाखों के पीछे है। आरोपित राजेश करनाल कोर्ट के बाहर रेहड़ी लगाता था।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से मर्सिडीज, आडी क्यू3, आडी क्यू5, बीएमडब्ल्यू, आईफोन और मैकबुक समेत अन्य सामान जब्त किया है। पुलिस ने इन वाहनों की नीलामी के माध्यम से पीड़ितों के नुकसान की भरपाई किए जाने की अनुमति के लिए अदालत में अर्जी दी है।

7,500 रुपये से शुरू हुआ था सफर

पुलिस जांच के अनुसार राजेश को उसके दोस्त प्रमोद कंबोज ने ब्लूम कंपनी नामक पोर्टल से जोड़ा था। उसने शुरुआत में 7,500 रुपये लगाए। कंपनी बंद होने के बाद उसने दूसरी स्कीम में दो लाख रुपये निवेश किए और इसके बाद वह कथित तौर पर निवेशकों का नेटवर्क खड़ा करने में जुट गया।

चंडीगढ़, मोहाली और अन्य शहरों में सेमिनार आयोजित कर लोगों को निवेश के लिए जोड़ा गया। अधिक नेटवर्क बनाने पर राजेश को कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट हेड की जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आई है। राजेश ने कथित तौर पर दावा किया था कि कंपनी की ओर से उसे मर्सिडीज कार गिफ्ट की गई और उसने कम समय में दो करोड़ रुपये कमाए।

एप पर 30 लाख बन जाते थे 68 लाख रुपये

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपितों ने ब्लूम ड्राइव, एलपीएनटी क्रिप्टोकरेंसी एमएसवीपी (मेटा सायल वर्से प्लान) और सायल वर्से जैसे नामों से प्लेटफार्म तैयार किए थे। आरोप है कि एप पर निवेश की रकम और रिटर्न के आंकड़ों में हेरफेर कर छह महीने में 30 लाख रुपये के निवेश को 68 लाख रुपये तक दिखाया जाता था।

निवेशकों को दुबई में फ्लैट और प्लाॅट दिलाने का लालच भी दिए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। जब निवेशक रकम निकालने की मांग करते तो कथित तौर पर उसे दूसरी क्रिप्टो स्कीम में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था।

बाइक से ऑडी-बेंज तक पहुंचा नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक आरोपितों की कथित लग्जरी लाइफस्टाइल भी निवेशकों को आकर्षित करने का जरिया बनी। शुरुआत में बाइक से आने वाले आरोपित बाद में आडी और बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाड़ियों में पहुंचने लगे। इसी दिखावे से प्रभावित होकर कई कारोबारी और पढ़े-लिखे लोग भी कथित निवेश योजना में पैसा लगाते चले गए।