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पंचकूला सेशंस कोर्ट से कर्नल को झटका, प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी के दो आरोपितों की बरी का फैसला बरकरार

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:08 PM (IST)

पंचकूला सेशंस कोर्ट ने प्लॉट दिलाने के नाम पर कर्नल से 15.40 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में दो ...और पढ़ें

सेशंस कोर्ट ने कर्नल की तरफ से दायर अपील को खारिज किया। (सांकेतिक फोटो)

सेशंस कोर्ट ने कर्नल की तरफ से दायर अपील को खारिज किया। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. प्लॉट के नाम पर 15.40 लाख की धोखाधड़ी का आरोप।

  2. अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी साबित करने में विफल रहा। 

  3. कोर्ट ने कर्नल बलराम सिंह बड़वाल की अपील खारिज की।

जागरण संवाददाता, पंचकूला। प्लाॅट दिलाने के नाम पर सेना के कर्नल से 15.40 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में दो आरोपितों को बरी करने का फैसला बरकरार रहेगा है। सेशंस कोर्ट ने कर्नल बलराम सिंह बड़वाल की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया है।

अदालत ने कहा कि रिकाॅर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शिकायत के अनुसार, कर्नल बलराम सिंह बड़वाल की मुलाकात वर्ष 2014 में गौरांश एसोसिएट्स के मालिक मनव मल्होत्रा से हुई थी।

आरोप था कि मल्होत्रा ने मोहाली के न्यू चंडीगढ़ के डीएलएफ मुल्लांपुर में 24 लाख रुपये में प्लाॅट दिलाने का भरोसा देकर उनसे 11 नवंबर 2014 को पांच और दो लाख रुपए के चेक लिए। इसके बाद 27 दिसंबर को 8.40 लाख रुपए और लिए गए।

इस तरह कुल 15.40 लाख रुपए उन्होंने मल्होत्रा को दिए थे। बावजूद न तो एग्रीमेंट हुआ और न ही प्लाॅट मिला। शिकायतकर्ता के अनुसार रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी बाउंस हो गए।

मामले में पुलिस ने मनव मल्होत्रा और राकेश सादिक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच के बाद चालान पेश किया था। ट्रायल कोर्ट ने 6 सितंबर 2019 को साक्ष्यों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ कर्नल ने सेशंस कोर्ट में अपील दायर की थी।

प्लाॅट का नंबर तक नहीं बता सके शिकायतकर्ता

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की गवाही में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं। जिस प्लाट के लिए 15.40 लाख रुपये देने का दावा किया गया, उसकी पहचान संबंधी पर्याप्त दस्तावेज रिकाॅर्ड पर नहीं थे।

अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता की ओर से पहले दायर एनआई एक्ट की शिकायत में इस कथित प्लाट सौदे और राकेश सादिक का कोई जिक्र नहीं था। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कर्नल की अपील खारिज कर दी।