टैक्सी ड्राइवर की हत्या में पंचकूला कोर्ट का बड़ा फैसला, सबूतों के अभाव में पांच आरोपित किए बरी
पंचकूला जिला अदालत ने टैक्सी चालक प्रदीप कुमार की हत्या के छह साल पुराने मामले में पांच आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

छह साल पुराने हत्या के मामले में पंचकूला जिला अदालत का फैसला। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
पुलिस ने मामले में छह आरोपित किए थे गिरफ्तार।
सबूतों की कमी और गवाहों के बयान पलटने से फैसला।
जुलाई 2020 में पटियाला के टैक्सी चालक का शव मिला था।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। टैक्सी ड्राइवर प्रदीप कुमार की हत्या के करीब छह साल पुराने मामले में जिला अदालत ने सोमवार को पांच आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
बरी हुए आरोपितो में बृजपाल सिंह, सरबजीत सिंह उर्फ जग्गा, बिक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की, सुरेश कुमार उर्फ सन्नी दयोल और कमल शामिल हैं। मामले में छठे आरोपित अवतार सिंह की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
बृजपाल सिंह और सरबजीत सिंह अभी तक जेल में बंद थे, जबकि अन्य आरोपित जमानत पर बाहर थे। फैसले के बाद दोनों को भी राहत मिली है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता एसपीएस परमार ने बताया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों पर लगाए गए आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा।
अदालत में ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि बरी किए गए आरोपित प्रदीप कुमार की हत्या में शामिल थे। मामले में कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था। वहीं पुलिस के बनाए गए कुछ गवाहों के बयान से पलट गए। इसी आधार पर अदालत ने पांचों को बरी करने का फैसला सुनाया।
बद्दी सवारी छोड़ने गया था प्रदीप, बाद में मिली मौत की सूचना
मामले के अनुसार, प्रदीप कुमार मूल रूप से पंजाब के पटियाला का रहने वाला था और अपनी पत्नी के साथ मोहाली के कुंभड़ा में रहता था। वह टैक्सी चलाता था। 10 जुलाई 2020 को वह मोहाली से सवारी लेकर हिमाचल प्रदेश के बद्दी गया था।
प्रदीप की पत्नी रणजीत कौर ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि उसी दिन शाम करीब 4 बजे उन्हें फोन आया कि उनके पति का सिसवां रोड पर एक्सीडेंट हो गया है और उन्हें कालका अस्पताल ले जाया गया है। वह अस्पताल पहुंचीं तो वहां प्रदीप की मौत हो चुकी थी।
हादसा नहीं, हत्या का मामला निकला
शुरुआत में घटना को सड़क हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ने पर मामला हत्या का निकला। इसके बाद पिंजौर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर छह लोगों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई और अदालत में चालान पेश किया। हालांकि, ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ ऐसा ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिससे उनकी हत्या में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित हो सके।
