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सेना के जवान की आत्महत्या केस में पत्नी बरी, सास समेत तीन को पंचकूला कोर्ट ने सुनाई सजा

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:56 PM (IST)

पंचकूला कोर्ट ने सेना के जवान रोहित राणा की आत्महत्या मामले में सास समेत तीन लोगों को साढ़े तीन साल ...और पढ़ें

पंचकूला की अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

पंचकूला की अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. सात साल से अधिक समय तक चला मुकदमा।

  2. साढ़े तीन-तीन साल की सजा, दो-दो हजार जुर्माना।

  3. लगातार प्रताड़ित करने-धमकाने का था आरोप।


जागरण संवाददाता, पंचकूला। चंडीमंदिर स्थित आर्मी कमांड अस्पताल में लगभग 10 साल पहले सैनिक रोहित राणा की आत्महत्या के मामले में वीरवार को फैसला सुनाया गया। सेना के जवान रोहित राणा की आत्महत्या के मामले में पंचकूला की अदालत ने तीन दोषियों को साढ़े तीन-साढ़े तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

दोषियों में मृतक की सास बाला देवी, पवन कुमार और सुदर्शन सिंह शामिल हैं। तीनों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जबकि पत्नी को कोर्ट ने बरी कर दिया।

रोहित ने मरने से पहले सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ित करने और ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे। पुलिस को यह नोट रोहित के शव के पास बिस्तर के तकिये के नीचे से मिला था।

मामले में पुलिस ने सास बाला देवी, सास के देवर और जेठ के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि सैनिक रोहित राणा पर आरोपित उसके माता-पिता को छोड़कर ससुराल में रहने और माता-पिता को गुजारा भत्ता न देकर अपना पूरा वेतन सास को देने का दबाव बनाते थे। ऐसा नहीं करने पर दहेज, मारपीट और चोरी के आरोप लगाकर फंसाने की धमकी दी जा रही थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि भारतीय सेना में सेवारत रोहित राणा दोषियों की ओर से लगातार किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न, धमकियों और अपमान के कारण भारी मानसिक तनाव में था।

इसी परिस्थितियों में उसने आत्महत्या कर ली थी। सरकारी वकील ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की थी। मामले में एफआइआर पांच सितंबर 2016 को दर्ज की गई थी। दोषियों को वर्ष 2018 में गिरफ्तार किया गया। सात साल से अधिक समय तक मामले की सुनवाई चली।

बचाव पक्ष ने मांगी थी नरमी

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों की उम्र, बीमारियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की। बाला देवी ने खुद को विधवा बताते हुए अपने परिवार की जिम्मेदारियों का जिक्र किया।

वहीं, पवन कुमार और सुदर्शन सिंह ने भी अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और परिवार की जिम्मेदारियों के आधार पर कम सजा देने की अपील की।