विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पर्ची कटी पर इंजेक्शन-ड्रेसिंग के लिए भटकते रहे मरीज, पंचकूला सिविल अस्पताल में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प

Published: Mon, 05 Oct 2026 01:31 PM (IST)

पंचकूला सिविल अस्पताल में नर्सिंग अधिकारियों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में पेन-डाउन हड़ताल से सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

हड़ताल पर बैठा स्टाफ, मरीज परेशान।

हड़ताल पर बैठा स्टाफ, मरीज परेशान।

HighLights

  1. नर्सिंग अधिकारियों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में हड़ताल

  2. पंचकूला सिविल अस्पताल में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित

  3. मरीजों को इंजेक्शन, ड्रेसिंग जैसी सेवाओं के लिए भटकना पड़ा

जागरण संवाददाता, पंचकूला। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग ऑफिसर्स की दो घंटे की पेन-डाउन स्ट्राइक से सोमवार को सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा।

सुबह 10 से 12 बजे तक ओपीडी में पर्ची बनती रही, लेकिन मरीजों को इंजेक्शन लगवाने, ड्रेसिंग कराने, दवा लेने और बीपी-शुगर की जांच के लिए इंतजार करना पड़ा।

भर्ती मरीजों को रूटीन इंजेक्शन और ड्रिप लगाने के लिए भी नर्सिंग स्टाफ के दोबारा काम पर लौटने का इंतजार करना पड़ा। कई तीमारदार खुद ही मरीजों की जरूरत का सामान जुटाते नजर आए।

हड़ताल पर बैठा नर्सिंग स्टाफ

नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर शुरू हुई यह पेन-डाउन स्ट्राइक 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना सुबह 10 से 12 बजे तक चलेगी। एसोसिएशन के अनुसार प्रदेश के करीब 5500 नर्सिंग ऑफिसर और पंचकूला जिले के 100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर इसमें शामिल हैं।

हालांकि मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है। इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, बच्चों की इमरजेंसी और इमरजेंसी आपरेशन थियेटर में सेवाएं सामान्य रहीं। इसके बावजूद ओपीडी और जनरल वार्डों में नर्सिंग सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ी।

पांच साल पूरे होते ही दूर-दराज तबादले का विरोध

एसोसिएशन की स्टेट प्रेसिडेंट विनीता कुमारी ने कहा कि कैडर में करीब 95 प्रतिशत महिला स्टाफ है। नर्सिंग ऑफिसर तीनों शिफ्ट में 24 घंटे सेवाएं देती हैं। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकाल और नर्सिंग स्टाफ से चर्चा किए पांच साल की सेवा पूरी होते ही कर्मचारियों को दूर-दराज जिलों में ट्रांसफर किया जा रहा है।

सुरक्षा कारणों ने बढ़ाई चिंता

उन्होंने कहा कि पीएचसी और सीएचसी स्तर पर महिला नर्सिंग स्टाफ को कई बार महिला अटेंडेंट के बिना अकेले नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है। ऐसे में दूर-दराज तबादलों से सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ेंगी।

एसोसिएशन ने कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन की भी मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से कर्मचारियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की बात कही गई है।

यह भी पढ़ें- एशियाई खेलों में बजा हरियाणा का डंका: 85 में से 32 पदकों पर कब्जा, खेल मंत्री ने धाकड़ खिलाड़ियों का किया स्वागत