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पंचकूला: फर्जी चेक, जाली हस्ताक्षर... सरकारी खातों से 160.85 करोड़ की फर्जी निकासी, कैंसिल चेक से निकाले 10 करोड़

Published: Sat, 26 Sep 2026 09:31 AM (IST)

CBI की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सरकारी विभागों के बैंक खातों से 160 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जिसमें छह IAS अधिकारी भी आरोपी हैं।

सरकारी खातों से 160.85 करोड़ की फर्जी निकासी (फाइल फोटो)

सरकारी खातों से 160.85 करोड़ की फर्जी निकासी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. CBI ने सरकारी खातों से 160 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया।

  2. चार्जशीट में 6 IAS अधिकारियों और बैंक अधिकारियों को आरोपी बनाया गया।

  3. फर्जी चेक, जाली हस्ताक्षर से रकम निकाली गई, डिजिटल साक्ष्य भी मिले।

जागरण संवाददाता, पंचकूला। सरकारी विभागों के बैंक खातों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी कर निकासी के मामले में सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बैंकिंग प्रक्रिया और सरकारी धन की निगरानी से जुड़े कई चौका देने वाले खुलासे हुए हैं।

छह आइएएस अधिकारियों मोहम्मद शाईन, साकेत कुमार, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल पर विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एक निजी बैंक में रखे सरकारी खातों से करीब 160.85 करोड़ रुपये की 30 कथित फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन की गईं। जबकि संबंधित शाखाओं में सरकारी खाते थे ही नहीं।

यही नहीं कैंसिल चेक को लगा 10 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।

फर्जी चेक, जाली हस्ताक्षरों से भुगतान

सीबीआई के मुताबिक जांच के दौरान फर्जी चेक, कथित जाली हस्ताक्षर, फर्जी डेबिट नोट, गलत बैंकिंग रिकॉर्ड और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं।

चार्जशीट में एयू स्माल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरनजीत सिंह रंधावा को 37वें आरोपित के तौर पर नामजद किया है। निदेशक पंचायत एमएमजीएवाई 2.0 के खाते से हुई 14 कथित फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन में जाली चेक और डेबिट नोट इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार 16 अक्टूबर 2025 को 8 करोड़ रुपये, 4 नवंबर को 25 करोड़ रुपये और 15 नवंबर को 2.25 करोड़ रुपये कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर किए गए।

सीबीआई ने बैंक की एसओपी का हवाला देते हुए कहा है कि बड़े लेनदेन में हस्ताक्षर, चेक की वैधता, यूवी फीचर समेत निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी की जानी थी।

जांच एजेंसी के अनुसार एयू बैंक खाते से निकाली गई रकम का एक हिस्सा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स समेत अन्य खातों में पहुंचा। चार्जशीट में 15 जनवरी 2026 को करीब 25.33 करोड़ रुपये स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से आगे एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए जाने का उल्लेख है।

18.46 करोड़ की कथित फर्जी एफडी

मामले में सरकारी विभाग को 18.46 करोड़ रुपये की ऐसी एफडी से संबंधित दस्तावेज भेजे जाने का भी आरोप है, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में बनाई ही नहीं गई थी। चार्जशीट के अनुसार 23 जनवरी 2026 के एक पत्र में 11 एफडी के कथित फर्जी विवरण तैयार कर विभाग को भेजे गए।

सीबीआई का आरोप है कि बैंक के एक कर्मचारी ने तत्कालीन बैंक अधिकारियों के निर्देश पर यह पत्र ई-मेल के माध्यम से संबंधित विभाग को भेजा। जांच में बैंक अधिकारियों के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट और ई-मेल को भी अहम डिजिटल साक्ष्य बताया गया है।