सुधीर तंवर, चंडीगढ़। Stubble Burning: खेतों में धान की कटाई शुरू होते ही पराली (धान के फसल अवशेष) जलाने के मामले सामने आने शुरू हो गए हैं। इस पर सतर्क हुई प्रदेश सरकार ने किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित करने को कृषि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है तो फसल अवशेष जलाने के मामलों की निगरानी के लिए वायु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि, राज्‍य में अब तक पराली प्रबंधन का कार्य सुस्‍त रहा है और इसके लिए केंद्र सरकार से मिली राशि का आधा ही इस्‍तेमाल हो पाया है।

केंद्र से मिली 191.53 करोड़ रुपये की पहली किस्त में से 54 प्रतिशत राशि का हो पाया इस्तेमाल

सेटेलाइट के साथ ही गांवों में स्थानीय स्तर पर टीमें पराली जलाने के मामलों पर नजर रखेंगी। खेत में ही पराली के प्रबंधन के लिए इस साल पहली किस्त के रूप में हरियाणा को केंद्र की तरफ से 191.53 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। हालांकि इसमें से करीब 54 प्रतिशत राशि का ही अभी तक इस्तेमाल हो पाया है।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ बैठक में भी यह मुद्दा उठा। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए पराली प्रबंधन के कार्य में तेजी लाने को कहा है।

 सीएम ने कृषि अधिकारियों से किया जवाब तलब, पराली प्रबंधन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश

वहीं, कृषि अधिकारियों का तर्क है कि धान का सीजन अभी शुरू हुआ है। पहले चरण में फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनें उपलब्ध कराने के लिए अनुदान पर बजट की आधी से अधिक राशि खर्च कर दी गई है। बायोमास आधारित बिजली संयंत्रों, सीबीजी प्लांट, एथनाल प्लांट सहित पराली का इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों को वित्तीय सहायता के साथ ही पराली की गांठें बनाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये दिए जाएंगे। बजट की बची राशि का इस्तेमाल इस मद में किया जाएगा।

किसानों और पराली आधारित परियोजनाओं को वित्तीय मदद के लिए पड़ेगी अतिरिक्त बजट की जरूरत

इतना ही नहीं, पराली प्रबंधन के लिए केंद्र से अतिरिक्त बजट की भी जरूरत पड़ेगी ताकि फसल अवशेष जलाने के मामलों को शून्य स्तर पर लाया जा सके। दरअसल दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को कम करने और फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए सब्सिडी के साथ आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2018-19 में केंद्र सरकार ने योजना शुरू की थी।

इसके तहत फसल अवशेष प्रबंधन वाली मशीनों यथा सुपर स्ट्रा प्रबंधन प्रणाली, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्चर, पैडी स्ट्रा चापर, हाइड्रोलिकली रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल, क्राप रीपर और रीपर बाइंडर जैसी मशीनें किसानों को आधी कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। किसान उत्पादक संगठनों और पंचायतों की सहकारी समितियों को 80 प्रतिशत रियायत दी जाती है।

चार साल में केंद्र से मिले 693 करोड़ रुपये

पराली प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2018-19 से 2021-22 की अवधि में हरियाणा को कुल 693.25 करोड़ दिए गए हैं जिसकी मदद से प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में तेजी से गिरावट आई है। इस दौरान छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के 6775 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए, जबकि 59 हजार 107 किसानों को व्यक्तिगत रूप से फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई गईं।

कोरोना काल में जली सर्वाधिक पराली

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में प्रदेश में करीब 14.63 लाख हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई थी। तमाम इंतजामों और सख्ती के बावजूद 3.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पराली जलाई गई। यह पिछले चार सालों में सबसे ज्यादा है। कोरोना महामारी के दौर में किसानों ने सर्वाधिक पराली जलाई।

हरियाणा में पराली प्रबंधन की स्थिति

वर्ष                             कितने क्षेत्र में जली पराली -                पराली प्रबंधन पर खर्च

2018 -                         2.45 लाख हेक्टेयर -                      132.86 करोड़ रुपये

2019 -                         2.37 लाख हेक्टेयर -                       101.49 करोड़ रुपये

2020 -                         2.16 लाख हेक्टेयर -                       205.75 करोड़ रुपये

2021 -                         3.54 लाख हेक्टेयर -                      151.39 करोड़ रुपये।

Edited By: Sunil kumar jha