हरियाणा में 45 हजार से ज्यादा सक्रिय अपराधी पुलिस के रडार पर, 26 हजार की हो चुकी जांच
हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए इंटेलिजेंस और डेटा आधारित पुलिसिंग को मजबूत किया है। आरजेएसएफ ...और पढ़ें
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हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल। फाइल फोटो
HighLights
पुलिस ने इंटेलिजेंस और डेटा आधारित पुलिसिंग मजबूत की।
45 हजार से अधिक सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार।
26 हजार से अधिक अपराधियों का सत्यापन पूरा हो चुका है।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और सक्रिय अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए इंटेलिजेंस और डेटा आधारित पुलिसिंग को मजबूत किया है। आरजेएसएफ (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) पैटर्न के तहत एक फरवरी से 25 अगस्त तक प्रदेश में 45 हजार 207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया गया, जिसमें से 26 हजार 26 यानी 57.57 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन पूरा हो चुका है। पुलिस अब शेष 19 हजार 137 अपराधियों की जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रही है।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बदलते अपराध के स्वरूप को देखते हुए पुलिसिंग को इंटेलिजेंस आधारित, तकनीक समर्थित और डेटा संचालित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सक्रिय अपराधियों की सही पहचान, उनकी वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी अपराध नियंत्रण की पहली आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य केवल अपराधियों का रिकार्ड रखना नहीं, बल्कि उपलब्ध डेटा का उपयोग कर अपराध को होने से पहले रोकना है।
आरजेएसएफ (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) के तहत अपराधियों की साप्ताहिक जांच कर उनकी वर्तमान स्थिति और रिकार्ड लगातार अपडेट किया जा रहा है। सत्यापन में 7,425 अपराधी अपने दर्ज पते पर मिले, जबकि 1,612 जेल में पाए गए। 375 अपराधियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अब तक 6,762 अपराधियों का एफआरएस (फेस रिकाग्निशन सिस्टम-यानी चेहरा आधारित पहचान) डेटा भी अपलोड किया जा चुका है, जिससे पहचान और तकनीकी निगरानी को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सिरसा में 81.97 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन पूरा
पुलिस महानिदेशक के अनुसार इस माडल की शुरुआत रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जैसे संवेदनशील जिलों से हुई थी। इसकी उपयोगिता को देखते हुए इसे अब प्रदेशभर में लागू किया जा रहा है। जिलों के स्तर पर भी सत्यापन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद में 100 प्रतिशत, हिसार में 99.11 प्रतिशत, सोनीपत में 93.13 प्रतिशत और सिरसा में 81.97 प्रतिशत अपराधियों का सत्यापन पूरा हो चुका है।
अजय सिंघल ने बताया कि पुलिस का फोकस अब अपराधियों की गतिविधियों, आपराधिक संपर्कों और संभावित नेटवर्क में बदलाव की समय रहते पहचान पर है। साथ ही जिलों के बीच डेटा साझा कर अंतर-जिला निगरानी और त्वरित कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की तैयारी है।
