जागरण संवाददाता, पंचकूला : घोषणा पत्र में किए वादों को पूरा न करने, 20 जुलाई को सीएम के साथ हुई मीटिग में मानी हुई मांगों को लागू ना करने व कर्मचारियों की नीतिगत के प्रति घोर उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ कर्मचारी 8 सितंबर को करनाल में आक्रोश रैली करेंगे। इस रैली को सफल बनाने के लिए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने कमर कस ली है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में 5 टीमों का गठन किया गया है। जिसका नेतृत्व राज्य प्रधान सुभाष लांबा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव सतीश सेठी, प्रेस सचिव इंद्र सिंह बधाना, मुख्य संगठन सचिव धर्मबीर फौगाट, कोषाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बाटू, उप प्रधान सीलक राम मलिक, सह सचिव रमेश अत्री, उप प्रधान जगरोशन व ऑडिटर संदीप सांगवान करेंगे। इसके अलावा सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व विभागीय संगठनों ने करीब 50 हजार वाल पोस्टर व करीब एक लाख हेड बिलों का वितरण किया जा रहा है। संघ के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व जिला एवं विभागीय यूनियनों की मीटिगों का आयोजन किया जा रहा है और बृहस्पतिवार से पांचों टीमें फील्ड में उतरेगी और कर्मचारियों से सीधा संपर्क करने के गेट करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। सुभाष लांबा ने बताया कि 2014 में भाजपा द्वारा जारी धोषणा पत्र में सफाई कर्मचारियों, गेस्ट टीचरों सहित अन्य अनुबंध कर्मियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, शिशु शिक्षा भत्ते में दोगुना बढ़ोतरी करने, छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने का वादा किया था। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई थी बैठक

जिसको सरकार पांच साल में लागू करने में पूरी तरह विफल रही है। सुभाष लांबा व सतीश सेठी ने बताया कि 20 जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व सरकार के बीच बातचीत हुई थी। इस मीटिग में मानी हुई मांगों जैसे सभी विश्वविद्यालयों के गैर शिक्षक कर्मियों की मांगों पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव द्वारा अलग से मीटिग का समय निश्चित करने, बिजली निगमों में कार्यरत डीसी रेट अनुबंध आधार पर लगे और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में कार्यरत टर्म अप्वाइंटी को आउटसोर्सिग नीति पार्ट-2 में करने, रोडवेज हड़ताल व देशव्यापी हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की उत्पीड़न एवं दमन की कार्यवाहियों को समाप्त करने, कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, पेक्स कर्मचारियों सहित अन्य विभागों के वंचित कर्मियों पर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग है।

Posted By: Jagran

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