जेएनएन, चंडीगढ़। संगठित अपराध से निपटने के लिए हरियाणा ने महाराष्ट्र के मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) की तर्ज पर हरकोका (हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) कानून बनाया है। संगठित अपराध के मामलों में किसी की मौत पर आरोपित को उम्रकैद से लेकर फांसी और न्यूनतम एक लाख रुपये के दंड का प्रावधान इस कानून में है। इस कानून में आरोपित को जमानत का प्रावधान नहीं है। यह सख्त कानून अभी तक महाराष्ट्र के अलावा केवल दिल्ली में ही लागू है।

विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सरकार ने चार साल से अधर में लटके हरकोका को पारित करा लिया। गृह विभाग द्वारा इसका ड्राफ्ट वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के बाद ही तैयार कर लिया गया था, लेकिन आइएएस व आइपीएस लॉबी में समन्वय के अभाव में यह कानून लागू नहीं हो सका था। राज्यपाल की मुहर के बाद लागू होने वाले नए कानून के तहत पांच साल से अधिक सजा के मामले में न्यूनतम जुर्माना पांच लाख रुपये रखा गया है। संगठित अपराध के दोषियों की मदद करने वाले व्यक्ति पर भी समान धाराएं लागू होंगी।

वहीं, शून्यकाल के बाद सरकार जब विधेयक पारित करने लगी तो कांग्रेस विधायक करण दलाल ने आपत्ति जताते कहा कि इसमें संशोधन जरूरी है। सरकार ने यह भी साफ नहीं किया कि किस स्तर का अधिकारी इसमें कार्रवाई के लिए मान्य होगा। इस पर संसदीय कार्यमंत्री रामबिलास शर्मा ने साफ किया कि आइपीएस अधिकारी के समक्ष ही बयान लिए जाएंगे और वही कार्रवाई करेगा। मामूली बहस के बाद सदन ने विधेयक पारित कर दिया।

हरकोका के तहत जांच एजेंसी खूंखार अपराधों, संगठित अपराध गिरोह और क्राइम सिंडिकेट चलाने वालों के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति के बाद केस दर्ज करेगी। हरकोका का जो ड्रॉफ्ट तैयार किया गया था उसमें पुलिस अधिकारियों को कई तरह की अतिरिक्त शक्तियां दिए जाने का प्रावधान है।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

 

 

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Kamlesh Bhatt

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस