चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। कोरोना वायरस (Corona Virus) के खिलाफ जंग के लिए जीवनशैली में बदलाव और लॉक डाउन (Lock Down) का पालन बेहद जरूरी है। ऐसा की कर रहे हैं हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता ओमप्रकाश धनखड़। देश भक्ति से ओतप्रोत और किसानों की दुख तकलीफों को उजागर करते हुए खुद के गीत-रागनियां गढऩे वाले धनखड़़ आजकल साहित्य साधना में व्यस्त हैं।

महात्मा बुद्ध का कोई सीरियल देखना नहीं छोड़ते धनखड़

महात्मा बुद्ध के जीवन पर आधारित धारावाहिक हों या फिर उन पर लिखी कोई पुस्तक, उसे देखना-पढ़ना धनखड़़ की दिनचर्या में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा की जड़ों से जुड़़े धनखड़ आजकल लेखन भी कर रहे हैं। कोरोना वायरस उनकी चिंता का बड़ा विषय है। अपने सर्किल के लोगों को नियमित फोन कर कोरोना से बचने की सलाह देने का धनखड़ कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

घर में व्‍यायाम करते हरियाणा के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़।

स्पेशल लड्डू, बुद्ध के सीरियल और यहूदी प्रोफेसर की किताब के कायल धनखड़

ओमप्रकाश धनखड़ भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री मनोहर लाल की कैबिनेट में कृषि, सिंचाई व पशुपालन मंत्री रह चुके हैं। कृषि व सिंचाई मंत्री रहते हुए उन्होंने लोगों को प्रेरित करने वाले कई गीत लिखे। कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते धनखड़ आजकल गुरुग्राम में रह रहे हैं। इससे पहले चंडीगढ़ और पंचकूला में रहते थे। धनखड़ ने फिलहाल अपनी जीवन शैली में मामूली बदलाव किया है। कार्यकर्ताओं और लोगों से मिलने का क्रम थोड़ा कम हुआ है, लेकिन प्रत्येक फोन काल का जवाब धनखड़ दे रहे हैं और फोन पर ही समस्या का समाधान कर रहे हैं।

घर में व्‍यायाम करते हरियाणा के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़।

धनखड़ सुबह साढ़े छह बजे उठते हैं। सुबह ही सात्विक घर में बने लड्डू के साथ एक कप चाय पीते हैं। फिर स्वाध्याय में लग जाते हैं। धनखड़ ने बताया कि आजकल यहूदी प्रोफेसर डा. मुवाल नोआ हरारी की पुस्तक 'सेपियंस' पढ़ रहे हैं, जिसमें 21वीं सदी के 21 सबक का जिक्र है। सोसायटी की समस्या और उनका समाधान कैसे हो, यह इस पुस्तक का सार है। धनखड़ समय मिलने पर आध्यात्मिक शिरोमणि ग्रंथ अष्टावर्क की गीता तथा जे. कृष्णमूर्ति की पुस्तक प्रथम और अंतिम मुक्ति का भी अध्ययन कर रहे हैं।

अष्टावर्क की गीता और जे कृष्णमूर्ति की प्रथम और अंतिम मुक्ति किताब का कर रहे अध्ययन

धनखड़ सिर्फ दो समय भोजन करते हैं। सुबह करीब साढ़े दस बजे उनका पहला नाश्ता और भोजन होता है, जबकि रात को आठ से नौ बजे के बीच भोजन कर लेते हैं। महात्मा बुध के सीरियल धनखड़ निरंतर देखते हैं। हर रोज कोई न कोई संदेशप्रद मूवी (फिल्म) देखना भी धनखड़ की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

दिन भर में जितने लोगों के फोन आते हैं, उन्हें जवाब देना तथा रात को दिन भर के अनुभवों को कलमबद्ध करना धनखड़ ने अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। धनखड़ का कहना है कि योग और कम आहार के साथ लाकडाउन का जिम्मेदारी से अनुपालन ही हमें गंभीर बीमारी से बचा सकता है।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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