जेएनएन, चंडीगढ़। सरकारी विभागों के बैंक खाते खोलने में वर्षों से चली आ रही खामियां उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार ने सभी विभागों को हर महीने के पहले सप्ताह में बैंकों से लेन-देन की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी विभाग का दो से ज्यादा बैंक खाता नहीं खोला जा सकेगा। अफसर अपने नाम से विभा ग की अोर से खाते नहीं खोल सकते। हालांकि जिन अफसरों ने पहले से खाते खुलवाए हुए थे, उनके खिलाफ सरकार एफआइआर दर्ज कराने से फिलहाल कन्नी काट रही है।

अब वित्त विभाग ने नियम बनाया है कि बैंकों में पैसा जमा कराने या लोन लेने के लिए भी विभागों को पहले ब्याज दरों की कोटेशन लेनी होगी। वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही बैंकों में खाते संचालित किए जा सकेंगे। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार सर्वाधिक ब्याज देने वाले बैंक में पैसा जमा होगा, जबकि सबसे कम ब्याज लेने वाले बैंक से लोन लिया जाएगा। तीन महीने तक के लिए दस करोड़ रुपये जमा कराने या उधार लेने के लिए विभागों को संबंधित पैनल के बैंकों से मेल के जरिये कोटेशन लेनी होगी। 

आइएफसीसी की मुहर के बाद ही खुलेगा खाता

नई व्यवस्था में सभी विभागों को बैंकों में जमा राशि या लोन की तमाम जानकारी बैंक के नाम के साथ अगले महीने के तीसरे दिन तक संस्थागत वित्त और ऋण नियंत्रण विभाग (आइएफसीसी) में देनी पड़ेगी। अगर कोई विभाग तीन महीने से अधिक समय के लिए बैंक में दस करोड़ रुपये जमा करना चाहता है या लोन लेना है तो उसे दस कार्य दिवस पहले संस्थागत वित्त और ऋण नियंत्रण विभाग को प्रस्ताव भेजना होगा। ऐसा प्रस्ताव प्रत्येक महीने की पहली या 15 तारीख को भेजना अनिवार्य किया गया है।

बंद होंगे फालतू के बैंक खाते

वित्त मंत्री अभिमन्यु के अनुसार, आइएफसीसी की स्वीकृति मिलने के बाद दर्जनों बैंकों में खातों को बंद कर सारा पैसा फाइनल किए गए बैंक में रखा जाएगा। अधिकतम दो खाते रखने की छूट दी गई है। इसके अलावा योजनाओं के लिए मंजूर धनराशि को अनावश्यक रूप से बैंकों में रखा गया तो विभाग से दो फीसद तक जुर्माना लिया जाएगा।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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