नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। हाईकमान की अनदेखी के चलते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अब कांग्रेस में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कोई कारगर रास्ता नहीं सूझ रहा है। आलाकमान की अनदेखी और समर्थकों के फिडबैक से हुड्डा को आगे की सियासत के लिए कोई राह नहीं सूझ रही। नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर हुड्डा ने रोहतक परिवर्तन महारैली के बाद बनाई 37 सदस्यीय कमेटी में शामिल नेताओं से अगली रणनीति के लिए राय ली मगर उनके ज्यादातर समर्थकों ने अलग पार्टी बनाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

ज्यादातर समर्थकों ने दी कांग्रेस में ही रहने की सलाह, अंतिम फैसला हुड्डा पर छोड़ा

हुड्डा के गढ़ रोहतक, सोनीपत और झज्जर के समर्थक नेताओं की राय छोड़ दें तो अन्य जिलों के नेताओं ने अलग पार्टी बनाने की रणनीति से अपने को अलग रखा। ज्यादातर नेताओं ने हुड्डा को कांग्रेस में रहकर ही हाईकमान के अनुसार संगठन मजबूत करके अपने राजनीतिक हित साधने का सुझाव दिया।

हुड्डा ने राज्य विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एचएस चड्ढा और कमेटी के संयोजक कांग्रेस विधायक उदयभान के साथ सभी नेताओं से अलग-अलग चर्चा की। बाद में पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा ने बताया कि कमेटी के सभी सदस्यों ने अंतिम फैसला पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर छोड़ दिया है।

बताया जाता है कि बैठक के बाद पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने साफ तौर पर कहा कि राज्य में कांग्रेस की हालत काफी पतली है। अब कांग्रेस संगठन सिर्फ मरहम पट्टी से मजबूत नहीं हो सकता। पांच साल तक राज्य में कांग्रेस की जिला और ब्लॉक स्तर पर इकाई नहीं रही हैं। ऐसे में बिना संगठन के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कोई खास करिश्मा नहीं कर पाएगी। इसलिए पार्टी हाईकमान को राज्य संगठन में बड़ा आपरेशन करना होगा।

हुड्डा खेमे में छाई निराशा

बेशक हुड्डा ने दिल्ली में अपने समर्थकों की बैठक बुलाकर एक बार फिर हाईकमान को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास किया, लेकिन उनके खेमे में पूरी तरह निराशा छाई रही। कोई नेता यह मानने को तैयार नहीं था कि मौजूदा प्रदेश कांग्रेस संगठन के साथ पार्टी विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर पाएगी। खुद हुड्डा भी मीडिया के सामने नहीं आए।

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नई पार्टी नहीं बनाने के पीछे नेताओं ने दिए सार्थक तर्क

हुड्डा को उनके समर्थक नेताओं ने नई पार्टी नहीं बनाने के पीछे सार्थक तर्क भी दिए। इन नेताओं का कहना था कि अब जब अगले 10 दिनों में चुनाव आचार संहिता लगने की पूरी संभावना है, ऐसे में नई पार्टी का स्वरूप नहीं बन सकता। इसके अलावा हुड्डा के तरकश में बसपा से समझौता करने का जो आखिरी तीर था वह भी जननायक जनता पार्टी के पाले में चला गया है। ऐसे में हुड्डा को कांग्रेस में ही रहकर हाईकमान से अपने समर्थकों के लिए जो मिल जाए, उसी पर संतोष करना चाहिए।

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पार्टी की कमान से नीचे मानने को तैयार नहीं हुए हुड्डा

सूत्र बताते हैं कि हुड्डा को कांग्रेस हाईकमान विधायक दल का नेता बनाने के लिए तैयार था मगर हुड्डा प्रदेशाध्यक्ष या फिर सीएम का चेहरा बनाए जाने से कम पर राजी नहीं हुए। कांग्रेस के सूत्र तो यह भी बताते हैं कि विधायक दल की नेता किरण चौधरी की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद विधायक दल के नेता पद पर भी हुड्डा की ताजपोशी की संभावनाएं छीन हो गई थीं।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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