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हरियाणा टीचर ट्रांसफर पॉलिसी में नहीं होगा कोई बदलाव, निदेशक ने खारिज की सभी आपत्तियां

Published: Sat, 19 Sep 2026 04:40 AM (IST)

हरियाणा में शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया है।

शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति में नहीं होगा कोई बदलाव।

शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति में नहीं होगा कोई बदलाव।

HighLights

  1. नई शिक्षक स्थानांतरण नीति में कोई बदलाव नहीं होगा

  2. प्राथमिक शिक्षकों का अनुभव टीजीटी-पीजीटी मेरिट में नहीं जुड़ेगा

  3. माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी आपत्तियां खारिज कीं

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षकों के लिए बनाई गई नई स्थानांतरण नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। न ही प्राथमिक शिक्षकों के सेवा अनुभव को टीजीटी-पीजीटी के ट्रांसफर मेरिट अंकों में जोड़ा जाएगा।

विभिन्न बिंदुओं पर उठाई गई आपत्तियों को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने खारिज कर दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि स्थानांतरण नौकरी का सामान्य हिस्सा है। कोई भी कर्मचारी अपनी पसंद की पोस्टिंग का दावा कानूनी आधार के रूप में नहीं कर सकता।

सुधीर गहलावत और 176 अन्य शिक्षकों ने 25 जून को जारी नई शिक्षक स्थानांतरण नीति के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थी। इसमें शिक्षक स्थानांतरण नीति के क्लाज-4 और क्लाज-6 को अस्वाभाविक, मनमाना और असंवैधानिक (अनुच्छेद 14, 15, 16 के उल्लंघन में) बताते हुए रद करने या उसमें संशोधन की मांग की गई थी।

याचियों की शिकायत थी कि निचले काडर यथा प्राथमिक शिक्षकों के सेवा अनुभव को प्रमोटेड काडर (टीजीटी और पीजीटी) के ट्रांसफर मेरिट अंकों में नहीं जोड़ा जा रहा है। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने विगत दो सितंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले प्रत्यावेदन पर दो सप्ताह के भीतर विचार करके कारण सहित उचित आदेश पारित किया जाए।

माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक जितेंद्र कुमार द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही नई पालिसी बनाई गई है। पुरानी नीति में उम्र के लिए 50 अंक थे, जबकि नई नीति में उम्र (30 अंक), काडर अनुभव (30 अंक), और विशेष परिस्थितियों (60 अंक) का प्रविधान किया गया है। विशेष परिस्थितियों के अंक गंभीर बीमारी, विकलांगता, महिला कर्मचारियों और दंपती मामलों जैसे मानवीय आधार पर तय किए गए हैं।

जहां तक निचले काडर के अनुभव का सवाल है, जेबीटी और टीजीटी दो अलग-अलग काडर हैं। प्रमोटेड पद पर केवल वर्तमान पद का वास्तविक अनुभव ही गिना जाना न्यायसंगत है, ताकि सीधी भर्ती से आए शिक्षकों के साथ अन्याय न हो। इसी तरह के मुद्दों पर दायर की गई अन्य याचिकाएं (जैसे शीला बनाम हरियाणा राज्य और संजीव कुमार बनाम हरियाणा राज्य) भी हाई कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी हैं। इसलिए शिक्षक स्थानांतरण नीति में बदलाव का कोई कारण नहीं बनता।