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हरियाणा में आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को नई उड़ान, पंचकूला में 70 पीजी सीटों को मिली मंजूरी

Published: Wed, 14 Oct 2026 04:47 PM (IST)

पंचकूला स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) को 14 विधाओं में 70 पीजी सीटों के साथ स्नातकोत्तर शिक्षा शुरू करने की अनुमति मिली है।

पंचकूला में आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को नई उड़ान।

पंचकूला में आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को नई उड़ान।

HighLights

  1. एनआईए पंचकूला को 70 पीजी सीटों की मंजूरी

  2. आयुर्वेद की 14 विधाओं में मिलेगी उच्च शिक्षा

  3. विशेषज्ञ प्रशिक्षण और शोध को मिलेगा बढ़ावा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंचकूला स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) में अब आयुर्वेद की 14 विधाओं में स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा का रास्ता खुलेगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) ने 70 सीटों के साथ 14 पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संस्थान को अनुमति पत्र (एलओपी) जारी किया है।

मौजूद शैक्षणिक सत्र से ही इन पाठ्यक्रमों में दाखिले शुरू होंगे। इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण के साथ शोध और नवाचार को गति मिलेगी। एनआईए पंचकूला राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के डीम्ड विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस के रूप में संचालित है। फिलहाल यहां बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की 100 सीटें हैं।

पहला बैच 2024-25 में शुरू हुआ था और 2025-26 में विद्यार्थियों ने दूसरे बैच में दाखिला लिया। 2026-27 के तीसरे बैच के लिए काउंसलिंग चल रही है, जिसके दो राउंड पूरे हो चुके हैं। डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी ने बताया कि आयुर्वेद की 14 विधाओं में उच्च शिक्षा मिलेगी।

मंजूर पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद संहिता, सिद्धांत एवं संस्कृत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण विज्ञान, रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोग निदान एवं विकृति विज्ञान, अगद तंत्र एवं विधि वैद्यक, स्वस्थवृत्त एवं योग, कौमारभृत्य-बाल रोग, कायचिकित्सा, पंचकर्म, स्त्री रोग-प्रसूति तंत्र, शल्य तंत्र और शालाक्य तंत्र शामिल हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम में पांच सीटें निर्धारित हैं। शालाक्य तंत्र की पांच सीटों में तीन कर्ण, नासा एवं मुख रोग चिकित्सा और दो नेत्र रोग चिकित्सा के लिए हैं। कुल 70 पीजी सीटों पर 2026-27 में दाखिले होंगे।

डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि एनआईए उत्तर भारत में आयुर्वेद शिक्षा, चिकित्सा और अनुसंधान के नए केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने से उच्च शिक्षा में विशेषज्ञता हासिल करने के इच्छुक युवाओं को अवसर मिलेगा। कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने 70 सीटों की मंजूरी को संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है। नए पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को शोध-अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करेंगे, ताकि विशेषज्ञता के जरिए समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।