जागरण संवाददाता, पंचकूला : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अमरावती प्रोजेक्ट के संबंध में राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआइएए) के आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही अमरावती एनक्लेव की एनवॉयरमेंट क्लीयरेंस को हरी झंडी दे दी है। यह मामला ग्रीन ट्रिब्यूनल में रमेश मलिक बनाम केंद्र सरकार एवं अन्य बनाम मैसर्ज अमरनाथ अग्रवाल इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड बनाम स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी और अन्य को पार्टी बनाया था। मामले में ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्न जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, ज्युडिशियल मेंबर जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल की बेंच ने अपना आदेश सुनाते हुए सभी याचिकाओं को डिस्पोज ऑफ कर दिया है।

सुनवाई के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि हमने प्रतिद्वंदी सबमिशन पर विचार किया है और सभी दस्तावेजों का अध्ययन किया है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआइएए) के आदेश से यह देखा जाता है कि उसके अनुसार भी ईआइए अधिसूचना 14 सितंबर 2006 में संलग्न सामान्य शर्त लागू नहीं होती है। इस प्रकार एसईआइएए द्वारा ईसी की अनुमति थी। गोवा फाउंडेशन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 4 दिसंबर 2006 के आदेश के आधार पर वन्यजीव मंजूरी की आवश्यकता को निरस्त कर दिया गया है, जिसे उक्त निर्णय के पैरा 50 और 51 में 21 अप्रैल 2014 के निर्णय में स्पष्ट किया गया था। इसलिए इसका प्रभाव है कि ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है। ईएसजेड अधिसूचना के संदर्भ में वन्यजीव मंजूरी की आवश्यकता है, जिसे छह महीने के भीतर जारी करने का निर्देश दिया गया था, हालांकि इसे अभी भी जारी नहीं किया गया है। एसईआइएए के आदेश में यह मानना कि इस तरह की मंजूरी की आवश्यकता विचाराधीन परियोजना के संबंध में लागू थी, सही नहीं है। इसलिए एसईआइएए की रिपोर्ट और आवेदक के रुख को स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि उस पर एन्वायरमेंट क्लीयरेंस को रद किया जा सके। आदेश के अनुसार सुखना वाइल्ड लाइफ अभी तक नोटिफाई नहीं हो पाया है, इसलिए अमरावती एनक्लेव प्रोजेक्ट की एनवॉयरमेंट क्लीयरेंस रद नहीं की जा सकती। यह प्रस्तुत किया जाता है कि अनुपालन रिपोर्ट विधिवत प्रस्तुत की गई है। यदि इसे प्रस्तुत नहीं किया गया होता, तो एसईआइएए अब तक कार्रवाई कर सकता था। रेन वाटर हार्वेस्टिग पिट स्थापित कर दिए गए हैं या प्रदान किए जाने की प्रक्रिया में हैं, क्योंकि परियोजना को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसी तरह ध्वनि निगरानी रिपोर्ट और शोर स्तर परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, क्योंकि परियोजना अभी पूरी नहीं हुई है। नियमों की अनुपालना करनी होगी। इसलिए याचिका को रद कर दिया।

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