-पंचकूला नगर निगम ने 25 लाख रुपये की लागत से खरीदी हैं दस मशीनें

-शहर में मच्छरों के खात्मे के लिए दस स्थानों पर लगाया जाएगा इसे

--------------- राजेश मलकानियां, पंचकूला

संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) के नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) द्वारा बनाई गई मशीन पंचकूला के लोगों को मच्छर के डंक से बचाएगी। नगर निगम पंचकूला ने करीब 25 लाख रुपये की लागत से नासा द्वारा ईजाद की गई 10 मशीनों को खरीदा है, जो मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित कर उनका खात्मा करेगी। यह मशीनें पंचकूला में 10 स्थानो राजीव कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, नाडा साहिब, बुडनपुर, भैंसा टिब्बा, पिंजौर में बंगाला बस्ती, कालका में भैरो की सैर व खड़क मंगोली, अभयपुर व बरवाला में लगाई जाएंगी। उल्लेखनीय है कि बारिश के बाद पंचकूला व आस-पास के क्षेत्र में जगह-जगह पानी खड़ा होने के बाद मच्छरों की तादाद बढ़ रही है, जिससे डेंगू व मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। पंचकूला नगर निगम ने मच्छरों से निपटने के लिए यह मशीनें खरीदी हैं। जिसे एक एजेंसी के माध्यम से अगले कुछ दिनों में शहर में लगाया जाएगा।

ऐसे काम करेगी यह मशीन

नासा के वैज्ञानिकों ने मच्छरों पर स्टडी के बाद इसे डेवलप किया है। आमतौर पर मच्छर इंसान का खून चूसते हैं। वैज्ञानिकों ने एक जगह इंसान का खून रखा, लेकिन देखा कि मच्छर इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली। इसके बाद कार्बन डाई आक्साइड से मच्छरों को आकर्षित करने की कोशिश की गई तो भी मच्छर आकर्षित नहीं हुए। इसके बाद ह्यूमन टेंपरेचर मेंटेन कर कार्बन डाई आक्साइड छोड़ी गई तो मच्छर इस ओर आकर्षित होने लगे। इस स्टडी के आधार पर ही नासा के वैज्ञानिकों ने मच्छर मारने की टेक्नोलॉजी को विकसित किया। तैयार की गई मशीन एक किलोमीटर एरिया के मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। ह्यूमन टेंपरेचर व कार्बन डाई आक्साइड छोड़ने पर मच्छर जब मशीन पर बैठेंगे तो तो यह मच्छरों को अपने अंदर खींच लेगी। मशीन में लगे ब्लेड मच्छरों को खत्म कर देंगे।

वजन 25 किलो व कीमत है ढाई लाख रुपये

नगर निगम के प्रशासक राजेश जोगपाल ने बताया कि करीब 25 किलोग्राम की यह एक मशीन ढाई लाख रुपये की है। अभी तक ऐसी मशीनें मुंबई व दिल्ली जैसे बड़े शहरों में स्थित एयरपोर्ट व बड़े अस्पतालों में लगाई गई हैं। हरियाणा में पंचकूला ऐसा पहला शहर है, जहां अगले दो हफ्तों में दस स्थानों पर मशीनें लगाई जाएंगी। इस मशीन का देश में सबसे पहले टेस्ट बेंगलुरु के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेबिलशमेंट में किया गया है।

Posted By: Jagran