चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल इनेलो में चल रही पारिवारिक लड़ाई पर पार्टी विधायकों ने चुप्पी साध ली है। चाचा (अभय सिंह चौटाला) और भतीजे (दुष्यंत चौटाला) के बीच चल रही आपसी खींचतान पर कोई पार्टी विधायक कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के फिलहाल फील्ड में होने की वजह से भी इनेलो विधायक चुप हैं। इन विधायकों को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है, जबकि पिछले चुनाव में टिकट से वंचित नेता दूसरे राजनीतिक दलों में अपनी संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं।

इनेलो के अधिकतर विधायकों को लग रहा कि अगले चुनाव में टिकट बांटने में अभय सिंह चौटाला की अहम भूमिका रहेगी। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का अभय सिंह चौटाला के सिर पर खुला हाथ इसकी अहम वजह है। लिहाजा पार्टी विधायक फिलहाल हवा के रूख के साथ बहने में ही होशियारी समझ रहे हैं।

इनेलो के पारिवारिक झगड़े को नजरअंदाज करने के अंदाज में अभय चौटाला फील्ड में उतर पड़े हैं। उन्होंने न केवल मंडियों का रुख किया, बल्कि साथ ही वे पार्टी के काडर बेस कार्यकर्ताओं, जिला व हलका प्रधानों, प्रभारियों विधायकों व पूर्व विधायकों से भी मुलाकात कर पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर उनकी नब्ज टटोल रहे हैं। चौटाला के निर्देश पर अब जिलाध्यक्ष उनके समर्थन में खुलकर सामने आ सकते हैैं।

इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा फील्ड में अभय चौटाला के साथ हैं। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला फिलहाल फरलो पर हैं। उन्हें 18 अक्टूबर को वापस जेल जाना है। उसके बाद दीपावली के आसपास डा. अजय सिंह चौटाला जेल से बाहर आएंगे। अजय चौटाला के जेल से बाहर आने के बाद इनेलो की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव संभव है।

इनेलो विधायक अजय सिंह चौटाला के बाहर आने तक बोलने से परहेज रखेंगे। उन्हें इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि टिकट बांटने में ओमप्रकाश चौटाला व अभय चौटाला की ही चलने वाली है। लिहाजा वे किसी तरह की बयानबाजी कर अपनी टिकट पर कैंची चलवाने का कोई रिस्क नहीं ले रहे हैं।

ओमप्रकाश चौटाला भी ले रहे काडर बेस कार्यकर्ताओं से फीडबैक

इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने भी तीन दिन चंडीगढ़ में बिताने के बाद फील्ड का रुख कर लिया है। चौटाला फिलहाल अपने निजी प्रभाव वाले जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने इनेलो यूथ विंग और इनसो नेताओं के निलंबन की कार्रवाई कर पार्टी कार्यकर्ताओं को हर सूरत में अनुशासित रहने का संदेश दिया है। खुद अभय चौटाला इस बात को मानते हैं और दलील देते हैं कि यदि अनुशासनहीनता उन्होंने स्वयं भी की होती तो उनके साथ भी यही कार्रवाई अमल में लाई जाती।

अभय और दुष्यंत बच रहे एक दूसरे पर टिप्पणियों से

ओमप्रकाश चौटाला की अपने परिवार के सदस्यों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन का संदेश देने के लिए अहम जरिया बनी है। लेकिन, साथ ही इस बात की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अति उत्साहित युवा इनेलो संसदीय दल के नेता दुष्यंत चौटाला पर अलग राह चलने का दबाव बना सकें, जिसकी संभावना बेहद कम नजर आ रही है। दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला इस पूरे घटनाक्रम में एक-दूसरे के विरुद्ध किसी तरह की तीखी टिप्पणी करने से साफ बच रहे हैं।

इनेलो की आपसी फूट पर भाजपा और कांग्रेस की निगाह

इनेलो के आपसी विवाद पर सत्तारूढ़ भाजपा और दस साल तक राज करने वाली कांग्रेस की निगाह टिकी हुई है। भाजपा और कांग्रेस नेता हालांकि इनेलो की आपसी फूट पर खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि चौटाला परिवार की यह लड़ाई अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के गणित पर अच्छा खासा फर्क डाल सकती है। पार्टी का एक बड़ा और समझदार तबका इनेलो की आपसी फूट के डैमेज कंट्रोल में भी जुटा हुआ है। इसकी जिम्मेदारी पार्टी के बुजुर्ग और मैनेजमेंट करने वाले नेताओं को सौंपी गई है।

इनेलो विधायकों का गणित

नब्बे सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में इनेलो दूसरा सबसे बड़ा दल है। सत्तारूढ़ भाजपा के 47 विधायक हैं। भाजपा को चार आजाद, एक निलंबित बसपा और एक इनेलो विधायक ने अपना समर्थन दे रहा है। कांग्रेस के 17 विधायक हैं। इनेलो विधायकों की संख्या 19 है, जिसमें से एक विधायक पार्टी के साथ नहीं है। एक आजाद विधायक कांग्रेस के साथ है और एक अकाली दल विधायक इनेलो के साथ है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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