चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा में सीआइडी को लेकर चल रहा विवाद भाजपा हाईकमान के पास पहुंच गया है। सीआइडी को गृह विभाग से अलग करने की अटकलों के बीच गृह मंत्री अनिल विज ने हाईकमान को पूरी रिपोर्ट दे दी है। विज पिछले कई दिनों से हाईकमान के संपर्क में हैं। माना जा रहा कि 21 जनवरी से आरंभ हो रहे विधानसभा के विशेष सत्र में सीआइडी को गृह विभाग से अलग करने का संभावित बिल अटक सकता है। वैसे भी सीआइडी को गृह विभाग से जुदा कर अलग विभाग बनाने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।

लगातार कई दिनों से भाजपा हाईकमान के संपर्क में हैं गृह मंत्री अनिल विज

गृह मंत्री अनिल विज ने फिर कहा है कि मुख्यमंत्री सर्वेसर्वा होते हैं। उन्हें किसी भी मंत्री के विभागों की जानकारी हासिल करने का अधिकार है। इसलिए सीआइडी को गृह विभाग से अलग करने की प्रक्रिया अपनाने की कोई जरूरत नहीं है। सीआइडी फिलहाल गृह विभाग का ही पार्ट है। सीआइडी की रिपोर्टिंग अभी भी गृह मंत्री के नाते अनिल विज को ही हो रही है। सीआइडी की अब तीन रिपोर्ट तैयार हो रही हैं। एक रिपोर्ट गृह मंत्री, दूसरी मुख्यमंत्री और तीसरी रिपोर्ट मुख्य सचिव के पास जाती है।

अनिल विज ने यहां तक कह दिया कि उनके पास खोने के लिए है ही क्या? विज के इस बयान का मतलब साफ है कि यदि गृह विभाग से सीआइडी को अलग किया गया तो वह किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यह सीमा गृह विभाग छोडऩे तक हो सकती है। चर्चा तो यह भी है कि विज शहरी स्थानीय निकाय विभाग भी छोड़ने की पेशकश कर सकते हैं, लेकिन भाजपा हाईकमान ऐसे हालात पैदा होने देने को कतई तैयार नहीं है। हाईकमान की पूरे मामले पर निगाह है।

सीआइडी को गृह विभाग से अलग करने संबंधी बिल पर भी संशय

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार सीआइडी को गृह विभाग से तैयार करने की अंदरूनी तैयारी चल रही है। ऐसा ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसे हरियाणा कैबिनेट की बैठक में पास कर विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इस ड्राफ्ट के तहत सीआइडी को गृह विभाग से कानूनी तौर पर अलग कर दिया जाएगा। नई परिस्थितियों में यह ड्राफ्ट सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा है।

21 जनवरी से विधानसभा का विशेष सत्र है। इससे पहले कैबिनेट की बैठक संभव नहीं है। हालांकि मुख्यमंत्री को कैबिनेट की मीटिंग संबंधी तमाम मामलों पर फैसले लेने का अधिकार होता है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भाजपा हाईकमान ने सीआइडी को गृह विभाग से अलग करने संबंधी कोई भी बिल लाने से रोक दिया है।

सीआइडी को अलग विभाग बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी

सीआइडी को गृह विभाग से अलग कर उसे अलग डिपार्टमेंट के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। इसके लिए पहले कैबिनेट की बैठक में मंजूरी होगी। फिर फाइल तैयार कर फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास जाएगी। उसके बाद दोबारा कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव आएगा। फिर विधानसभा में बिल पेश होगा। उसके बाद गवर्नर के पास जाएगा। गवर्नर से मंजूरी मिलने के बाद सीआइडी को अलग विभाग के तौर पर अधिसूचित किया जा सकेगा। हरियाणा पुलिस रुल्स 1974 के पेज नंबर 12 पर नियम तीन के तहत सीआइडी अभी गृह विभाग का ही पार्ट है।

इस्राइल व नार्वे की कंपनी कर रही हरियाणा में फोन टेप

सवाल उठता है कि सीआइडी को लेकर सरकार में तनातनी की नौबत क्यों आई? दरअसल, गृह मंत्री के नाते अनिल विज ने सीआइडी प्रमुख से वह रिपोर्ट तलब कर ली थी, जो विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की स्थिति के आधार पर तैयार की गई थी। कई दिनों तक जब यह रिपोर्ट नहीं आई तो विज ने स्पष्टीकरण मांग लिया।

रिपोर्ट मिलने के बाद अगले दिन ही विज ने उन लोगों की सूची भी तलब कर ली, जिनके फोन टेप किए जाते हैं। इस रिपोर्ट के मांगने पर सरकार में हड़कंप मच गया, जिसके बाद गृह मंत्री से सीआइडी को वापस लेने का खाका बुना जाने लगा। आशंका जताई जा रही है कि इस्राइल और नार्वे की प्राइवेट कंपनी हरियाणा में फोन टैपिंग के काम में लगी हैं।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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