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यमुनानगर के 27 वर्षीय कुलदीप नहीं लौटेेंगे घर, उनके अंगों से चार घरों में लौटी जिंदगी की उम्मीद

Published: Sun, 20 Sep 2026 08:03 PM (IST)

यमुनानगर के 27 वर्षीय कुलदीप सिंह की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला ...और पढ़ें

ब्रेन स्टेम डेड घोषित होने के बाद कुलदीप चार परिवारों के लिए जिंदगी और उम्मीद की वजह बने।

 ब्रेन स्टेम डेड घोषित होने के बाद कुलदीप चार परिवारों के लिए जिंदगी और उम्मीद की वजह बने।

HighLights

  1. कुलदीप सिंह की सड़क हादसे में हुई दुखद मृत्यु।

  2. परिवार ने अंगदान का लिया साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय।

  3. उनके अंगों से चार मरीजों को मिला नया जीवन।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। यमुनानगर के जगाधरी निवासी 27 वर्षीय कुलदीप अब कभी अपने घर नहीं लौटेगा। मां बीरा रानी की आंखें बेटे को तलाशेंगी और छोटे भाई परमिंदर के लिए बड़े भाई की कमी हमेशा बनी रहेगी।

कुलदीप सिंह की सड़क हादसे में मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, लेकिन इसी असहनीय दुख के बीच परिवार ने अंगदान की सहमति देकर चार अन्य जिंदगियों को नई उम्मीद दे दी।

चंडीगढ़ पीजीआई में कुलदीप की दोनों किडनियां दो मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं, जबकि दोनों कार्निया ने दो अन्य मरीजों को रोशनी की उम्मीद दी। एक परिवार का निजी दुख अब चार परिवारों के लिए जिंदगी और उम्मीद की वजह बन गया है।

 कुलदीप सिंह 15 सितंबर को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद उन्हें पहले सिविल अस्पताल, यमुनानगर ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए पीजीआई रेफर किया गया।

बताया गया कि स्कूटी चलाते समय स्पीड ब्रेकर के कारण वह गिर गए थे और उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। पीजीआई में इलाज के दौरान 17 सितंबर को दो बार जांच के बाद ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी ने निर्धारित प्रोटोकाॅल के तहत उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया।

कुलदीप के परिवार के लिए यह पल बेहद कठिन था। मां बीरा रानी और छोटे भाई परमिंदर के सामने 27 साल के बेटे और भाई को हमेशा के लिए खोने की सच्चाई थी। इसी दौरान परिवार को अंगदान के बारे में काउंसलिंग दी गई। गहरे दुख के बावजूद परिवार ने कुलदीप के सभी अंगों और कार्निया दान करने की सहमति दे दी।

मां बोलीं- किसी की जिंदगी बचेगी तो कुलदीप हमारे बीच रहेगा

कुलदीप की मां बीरा रानी ने कहा कि बेटे के घर वापस न आने की सच्चाई स्वीकार करना बेहद मुश्किल है। घर और परिवार सब कुछ उसके बिना बदला हुआ महसूस होता है। लेकिन जब वह सोचती हैं कि कुलदीप के अंग किसी को जिंदगी देंगे और उसकी आंखें किसी को दुनिया देखने में मदद कर सकती हैं, तो उन्हें लगता है कि उनके बेटे का एक हिस्सा अब भी उनके साथ है।

भाई ने सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता का लिया संकल्प

कुलदीप के छोटे भाई परमिंदर ने कहा कि जिस हादसे ने उनके परिवार को तोड़ दिया, वैसा किसी और परिवार के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़क हादसों और सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए काम करने की इच्छा जताई, ताकि दूसरे परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाया जा सके।

पीजीआई की ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर स्वाति थापा ने बताया कि किसी युवा बेटे और भाई को खोने वाले परिवार से अंगदान के लिए बात करना बेहद भावनात्मक स्थिति होती है। इसके बावजूद कुलदीप के परिवार ने असाधारण साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया। रोटो नार्थ के नोडल अधिकारी डाॅ .विजय ताड़िया ने भी परिवार के फैसले को मानवता की मिसाल बताया।