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हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा नेतृत्व को चुनौती, कुलदीप शर्मा ने छेड़ी नई सियासी जंग; CM पद की दावेदारी पर रार

Published: Fri, 09 Oct 2026 07:07 PM (IST)

हरियाणा कांग्रेस में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए ...और पढ़ें

भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुलदीप शर्मा। फोटो जागरण

भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुलदीप शर्मा। फोटो जागरण

HighLights

  1. पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने हुड्डा परिवार के नेतृत्व को दी चुनौती।

  2. हरियाणा कांग्रेस में 2029 चुनाव के लिए सामूहिक नेतृत्व की मांग।

  3. दीपेंद्र हुड्डा को करनाल से चुनाव लड़ने की सलाह, रोहतक से खुद लड़ेंगे।

अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में 2029 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई भले ही अभी दूर हो, लेकिन मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और नेतृत्व की कमान को लेकर सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा के बदले तेवरों ने प्रदेश कांग्रेस में नई बहस छेड़ दी है।

कभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाने वाले कुलदीप शर्मा अब उनके खेमे की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। सार्वजनिक रूप से हुड्डा को वरिष्ठ और सम्मानित नेता बताने के बावजूद उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश किए जाने पर कुलदीप शर्मा को सख्त आपत्ति है। उनकी इस आपत्ति ने कांग्रेस के भीतर चल रही नेतृत्व की खींचतान को उजागर कर दिया है।

कुलदीप शर्मा ने अभी नहीं खोले अपने पत्ते 

कुलदीप शर्मा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी संजय दत्त से भी 2029 का विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने का सुझाव दिया है।

सवाल यह है कि यह पार्टी को एकजुट करने की पहल है या हुड्डा खेमे के नेतृत्व को चुनौती देने की रणनीति है, इस पर कुलदीप शर्मा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

कुलदीप शर्मा ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा, दोनों को एक साथ चुनौती देकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं की व्यापक स्वीकार्यता का तर्क देते हुए हुड्डा को फरीदाबाद लोकसभा, दीपेंद्र सिंह को करनाल लोकसभा और जयप्रकाश जेपी को सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी है।

खुद के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि वह रोहतक से चुनाव लड़ सकते हैं। रोहतक भूपेंद्र हुड्डा व दीपेंद्र हुड्डा के प्रभाव वाला क्षेत्र है और यहां से अभी दीपेंद्र सांसद हैं।

नेतृत्व की स्वीकार्यता और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सीधा संदेश

ऊपरी तौर पर यह सलाह चुनाव क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण जैसी लग सकती है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने गहरे हैं। रोहतक को हुड्डा परिवार का मजबूत सियासी गढ़ माना जाता है। ऐसे में दीपेंद्र को करनाल और खुद को रोहतक से चुनाव लड़ने की बात कहना नेतृत्व की स्वीकार्यता और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सीधा संदेश है।

करनाल से कुलदीप शर्मा अपने बेटे चाणक्य पंडित को टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बनी थी। उन्हें कहीं न कहीं लगता है कि बेटे चाणक्य की टिकट में दीपेंद्र बाधा बने हैं, इसलिए वे उनके निशाने पर हैं।

सैलजा प्रकरण की पुनरावृत्ति या कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश

कुलदीप शर्मा के बागी तेवरों को दीपेंद्र समर्थक उसी नजरिये से देख रहे हैं, जिस तरह 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले कुमारी सैलजा की नाराजगी को कांग्रेस की हार से जोड़कर पेश किया गया था।

वहीं, सैलजा समर्थकों का तर्क है कि हुड्डा खेमे ने विरोधियों के सामने निर्दलीय उम्मीदवार खड़े करवाने और टिकट वितरण में गुटीय संतुलन बिगाड़ने जैसी गलतियां नहीं की होतीं तो नतीजे अलग हो सकते थे।

ऐसे आरोप-प्रत्यारोप कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी को फिर हवा दे सकते हैं। हालांकि, 2024 की हार के लिए किसी एक नेता या गुट को जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक दावों से आगे की बात है।

आक्रामक अंदाज वाले नेताओं से प्रभारी कर रहे बातचीत

हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त फिलहाल इस विवाद को ज्यादा तूल देने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि पार्टी को एकजुट करने और सड़कों पर सक्रिय करने की दिशा में काम हुआ है। मतभेदों पर नेताओं से बातचीत की जा रही है।

उन्होंने अपनी बात सीधे मीडिया की बजाय प्रभारी के माध्यम से कहने की स्वीकारोक्ति दी है। प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी चुनाव या टिकटों का समय नहीं है और इन पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। ऐसे में अगर कोई किसी को व्यक्तिगत सुझाव या सलाह दे तो यह उसका अपना विचार है।

वैसे भी एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कह चुके हैं कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को ही ऐसे फैसले लेने का अधिकार है।