चंडीगढ़ [सुधीर तंवर]। राष्ट्रीय स्तर पर कहीं भी हरियाणा का जिक्र हो और उसमें जाट बिरादरी का नाम न आए, यह हो नहीं सकता। कहीं पर भी हरियाणा का नाम आते ही जाटों के हृष्ट-पुष्ट शरीर की छवि उभरती है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परिणामों ने उन लोगों पर करारा तमाचा जड़ा है जो पढ़ाई-लिखाई में इस बिरादरी को हमेशा से कमतर आंकते रहे हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव को भी जवाब मिल गया होगा जिन्होंने पिछले दिनों कहा था कि पंजाबी और जाटों में अक्ल कम होती है। आइएएस की परीक्षा में जाट छोरे प्रदीप सिंह ने देशभर में पहले स्थान पर आकर सबकी बोलती बंद कर दी। प्रदेश के ढाई दर्जन युवाओं ने आइएएस-आइपीएस बनकर हरियाणवियों को गौरवान्वित कर रहे हैं। सेना में तो उनका सिक्का चलता है। बाकी कुश्ती और मुक्केबाजी में जाटों के छोरे-छोरियों का जवाब नहीं। इस पर क्या कहेंगे बिप्लव देव जी।

धन की श्री से चहक रहे चहल

भारतीय क्रिकेटर यजुवेंद्र चहल इन दिनों खूब चहक रहे हैं। अपनी सगाई के फोटो इंस्टाग्राम पर साझा कर सबको हैरान करने वाले चहल आइपीएल की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर भी उतने ही सक्रिय हैं। यजुवेंद्र सिंह की मंगेतर बनी धनश्री वर्मा वैसे तो पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने कोरियोग्राफर के रूप में भी अलग पहचान बनाई है। उनके डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे, जिन्हेंं शेयर करने में चहल भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

धनश्री का एक वीडियो इंटरनेट पर धमाल मचा रहा है जिसमें वह लहंगा गाने पर धमाकेदार अंदाज में डांस कर रही हैं। वीडियो में पहले तो यजुवेंद्र की भावी पत्नी काले रंग के कोट में डांस करती दिखती हैं, लेकिन जैसे ही लहंगा गाना शुरू होता है तो वह लहंगा पहनकर अपने डांस से तहलका मचा देती हैं। पीपीई किट में उनका डांस भी सराहा जा रहा है।

देश मना रहा आजादी का जश्न, स्वतंत्रता सेनानी दुखी

पूरा प्रदेश देश की आजादी की 76वीं वर्षगांठ मनाने में जुटा है, लेकिन जिन स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से हम अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त हुए, वे दुखी हैं। दुख भी जायज है। स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों की सुनवाई के लिए संयुक्त पंजाब के समय से जो स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति चली आ रही थी, वह अब खत्म हो चुकी है। कोरोना काल में पहले तो चेयरमैन ललती राम की विदाई हुई और फिर हरियाणा सचिवालय की पांचवीं मंजिल पर स्थित समिति का कार्यालय भी बंद हो गया। नतीजा यह निकला कि मई से प्रदेश के सभी 18 स्वतंत्रता सेनानी, 422 विधवाएं और उनके 34 आश्रित पेंशन व भत्तों को तरस रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों की पोतियों की शादी में दिए जाने वाला कन्यादान भी छह माह से नहीं मिला है। देश की आजादी को सब कुछ दांव पर लगाने वाले यह स्वंत्रता सेनानी परिवार अपना दुखड़ा किसे सुनाएं।

जय हो बाबुओं की

दफ्तरों में बाबुओं की सेवा-पानी के बिना कोई काम नहीं होता। इसका मर्म कर्मचारियों के ग्रुप में वायरल काल्पनिक कथा से समझा जा सकता है। हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाने के लिए यात्रा बिल दिया, लेकिन क्लर्क ने तीन ऑब्जेक्शन लगा दिए। राजा (भरत) से यात्रा की अनुमति नहीं ली गई। ग्रेड-2 के अफसर को हवाई यात्रा की अनुमति नहीं। केवल संजीवनी बूटी लानी थी, परंतु वह पूरा पहाड़ उठा लाये और ज्यादा लगेज के साथ यात्रा की। बिल वापस होने पर चिंतित हनुमान जी सीधे क्लर्क के पास पहुंचे और टीए बिल का 20 प्रतिशत ऑफर कर दिया। अब क्लर्क ने ऐसे सारे ऑब्जेक्शन खत्म कर दिए। राम अपनी पादुका के माध्यम से राजा थे, इसलिए उनकी अनुमति से यात्रा की गई। आपातकाल में ग्रेड-2 अफसर को हवाई यात्रा की अनुमति है। गलत पौधा आता तो पुन: यात्रा में ज्यादा खर्च होता। अत: बिल पास किया जाता है।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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