यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आंदोलन के लिए जाट नेता कर रहे गुप्त बैठकें, बनाई रणनीति
हरियाणा में 29 जनवरी सुबह से फिर जाट आंदोलन शुरू हो जाएगी। जाट संगठन आंदोलन के लिए रणनीति तैयार कर चुके हैं अौर उनकी गुप्त बैठकों का दौर जारी है।

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में जाट आंदोलन की तैयारियां जोरों पर है। कई खापों के विरोध के बावजूद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति आंदोलन पर अड़ी हुई है और विभिन्न जगहों पर धरना स्थलों को तैयार कर लिया गया है। इन जगहों पर टेंट आदि लगाए गए हैं। जाट नेताओं की विभिन्न जगहों पर गुप्त बैठकों में रणनीति तैयार की जा रही है। धरना 19 जिलों में शुरू होगा। जाट नेता यशपाल मलिक का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन पिछली बार की घटनाआें के कारण प्रदेश में तनाव है। कई जगहों पर धरनास्थलों को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
आंदोलन से कई खापों और जाट संगठनें के शामिल न होने के बावजूद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि इससे पीछे हटने का अब कोई सवाल नहीं है। समिति के नेताओं का कहना है कि आंदोलन को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है और इसके लिए जाटों में जबरदस्त उत्साह है।
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समिति के नेताओं ने जिलों में आंदोलन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। वे घर-घर जाकर लोगों को इसके लिए तैयार कर रहे हैं और समर्थन मांग रहे हैं। प्रशासन ने धरना स्थलों को सड़क व रेलमार्ग से दूर रखने काे कहा गया है, लेकिन कुछ जगहों पर धरना स्थल सड़कों के निकट भी बनाए जाने की सूचना है। बताया जाता है कि जींद में गांव ईक्कस में जहां धरनास्थल बनाया जा रहा है वह सड़क के किनारे है।
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रोहतक में जसिया गांव में जाट धरना देंगे। यहां बनाए गए धरना स्थल पर दिन भर जाट नेताआें की गहमागहमी रही। उन्होेंने धरने की तैयारियों की समीक्षा करने के साथ बैठक कर आंदोलन के बारे में रणनीति बनाई।

कैथल में धरनास्थल को लेकर अधिकारियों से बात करने पहुंचे जाट नेता।
हिसार में धरनास्थल को लेकर प्रशासन और जाट नेताओं के बीच टकराव पैदा हो गया है। प्रशासन उन्हें हिसार- सिरसा हाइवे के किनोर शनि मंदिर के पास धरना के लिए जगह दे रहा है, लेकिन जाट नेता मय्यड़ में धरना देने पर अड़े हुए हैं। प्रशासन मय्यड़ में धरना की इजाजत नहीं देने का कारण इसके हिसार-दिल्ली हाइवे पर होना बता रहा है।
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बताया जाता है कि सभी जिलों में जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर जाट नेताओं की गुप्त बैठकें हो रही हैं और इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है। जाट नेता अभी अपनी रणनीति खुलासा नहीं कर रहे हैं। लेकिन, बताया जाता है कि वे प्रशासन और पुलिस की रणनीति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।
उधर, कैथल में जाट नेताओं और प्रशासन में धरना स्थल को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। जाट नेता देबन कैंची में धरना देने पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन ने उन्हें जखोली गांव में इसके लिए जगह दी है। प्रशासनिक अधिकारियों और जाट नेताओं की इसको लेकर करीब सवा घंटे तक बैठक हुई, लेकिन बात नहीं बनी। जाट नेता बैठक छोड़कर चले गए।
दूसरी ओर, जाट नेता यशपाल मलिक ने कहा कि रविवार से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा अौर यह शांतिपूर्ण होगा। जाट अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं और इससे उन्हें कोई राेक नहीं सकता। सरकार हर बार आंदोलन के दौरान आरक्षण देने की बात कहती है अौर फिर मुकर जाती है या ऐसे हालात पैदा कर देती जिससे जाटों को उनका हक नहीं मिलता। गुड़गांव में यशपाल मलिक ने कहा कि पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान हिंसा में जाट समुदाय के लोगों की भूमिका नहीं थी।
दूसरी ओर, कलायत के विधायक जयप्रकाश जेपी ने हिसार में कहा कि राज्य सरकार मलिक पर लगाया देशद्रोह का केस वापस ले सकती है तो बाकी लोगों पर दर्ज केस को भी वापस ले। उन्होंने कहा कि वित मंत्री कैप्टन अभिमन्यू को भी उनकी कोठी जलाने का केस वापस ले लेना चाहिए। उनको इस मामले में उदारता दिखानी चाहिए। इससे बेहतर माहौल बनेगा।
