चंडीगढ़, [सुधीर तंवर]। विधानसभा चुनावों में जाटों ने झटका दिया तो भाजपा ने जाट बिरादरी को गले लगाने में देर नहीं लगाई। मनोहर मंत्रिमंडल में जाट समुदाय के चार मंत्री बनाते हुए सत्तारूढ़ पार्टी ने जाटों को रिझाने का दांव खेला है। लंबे अरसे के बाद प्रदेश में जाटों को सरकार में इतना प्रतिनिधित्व मिला है। यह पहला मौका है जब स्वर्गीय उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के परिवार के दो सदस्य किसी सरकार में मंत्री बने हैं। देवीलाल के प्रपौत्र दुष्यंत चौटाला प्रदेश के इतिहास में सबसे कम उम्र के उपमुख्यमंत्री बने हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के भाई रणजीत सिंह कैबिनेट मंत्री।

पहली बार किसी सरकार में स्वर्गीय उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के परिवार के दो सदस्य बने मंत्री

देवीलाल परिवार के पांच सदस्य विधानसभा पहुंचे हैं जिनमें से दो को कैबिनेट में जगह मिली है। लोहारू से भाजपा विधायक जयप्रकाश (जेपी) दलाल तथा कलायत से विधायक कमलेश ढांडा भी जाट कोटे से मंत्री बने हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक जाटों को इतना प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं।

दिल्ली में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा ने जाट कार्ड खेला है। बाहरी  दिल्ली में जाट चुनावी हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। तीन ओर से हरियाणा से घिरी दिल्ली में करीब 20 सीटें जाट बाहुल्य हैं। ऐसे में भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए यह चक्रव्यूह रचा।

मनोहरलाल मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ जाट समुदाय के चार मंत्री

हरियाणा में फरवरी-2016 के जाट आरक्षण आंदोलन में हुई हिंसा के बाद से ही प्रदेश के जाट भाजपा से नाराज चल रहे हैं। जाटों की नाराजगी की वजह से ही भाजपा मिशन-75 पार को पूरा करना तो दूर, बहुमत तक भी नहीं पहुंच पाई।

 

शपथ ग्रहण करते जेपी दलाल।

मनोहर कैबिनेट में चार जाट चेहरे शामिल होने के बाद भी देशवाली जाट बेल्ट यानी पुराने रोहतक को सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।  हालांकि पार्टी ने बागड़ी और बांगर जाट बेल्ट पर पूरा फोकस किया। रणजीत सिंह चौटाला बागड़ी बेल्ट से आते हैं। दुष्यंत सिंह चौटाला बागड़ी व बांगर बेल्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

लंबे अरसे बाद बढ़ा जाटों का प्रतिनिधित्व, भाजपा को दिल्ली में मिल सकता फायदा

दुष्यंत ने बांगर की उचाना कलां सीट से चुनाव जीता, जबकि वे मूल रूप से बागड़ी बेल्ट के गढ़ यानी सिरसा के रहने वाले हैं। इसी तरह कलायत की विधायक कमलेश ढांडा भी बांगर बेल्ट का प्रतिनिधित्व करती हैं। भिवानी की लोहारू सीट भी बागड़ यानी राजस्थान से सटी है। ऐसे में जेपी दलाल की गिनती भी बागड़ी बेल्ट के रूप में ही होगी। पुराने रोहतक के रोहतक, झच्जर व सोनीपत जिला की 14 सीटों में से भाजपा ने केवल दो - राई व गन्नौर में ही जीत हासिल की। महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू को देशवाली बेल्ट से प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त पर पासा पलट गया।

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हुड्डा सरकार में थे पांच जाट मंत्री

 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की दूसरी पारी में भी त्रिशंकु विधानसभा थी। हालांकि बाद में हजकां के छह में से पांच निर्दलीय विधायकों ने सरकार में विलय कर लिया था। उस समय जाट चेहरे के तौर पर हुड्डा खुद मुख्यमंत्री थे और उनकी कैबिनेट में रणदीप सिंह सुरजेवाला, किरण चौधरी, सतपाल सांगवान व सुखबीर सिंह कटारिया जाट मंत्री थे।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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