यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जाट आंदोलन : हिसार में रेलवे ट्रैक पर पहुंचे जाट व कैथल में हाइवे के पास धरना
हरियाणा में जाट आंदोलन आज शुरू हो गया। हिसार में जाट रेलवे ट्रैक के पास धरना दे रहे हैं। वहां ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। जाटों का हरियाणा में आंदोलन आज से शुरू हो गया है। राज्य में विभिन्न जगहों पर जाट अांदोलनकारी विभिन्न जिलों में बनाए गए धरनास्थलों पर पहुंच रहे हैं। आंदोलन को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। राज्य के 19 जिलों में जाटों का आंदोलन शुरू हुआ है। हिसार और कैथल में धरनास्थल को लेकर विवाद के कारण तनाव की हालत पैदा हो गई। हिसार में जाट मय्यड़ में हाइवे या रेलवे ट्रैक के किनारे धरना देने पर अड़ गए। उन्होंने रेलवे ट्रैक के पास धरना शुरू कर दिया। कैथल में जाटों ने देवबन कैंची गांव में धरना देना शुरू कर दिया, जबकि उनको पहले जाखोली में धरना देने की अनुमति दी गई थी। राज्य में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की भी सूचना है।
हिसार में जाट आंदोलनकारी मय्यड़ और रामायण गांव के पास रेलवे ट्रैक से महज 100 मीटर की दूरी पर धरने पर बैठ गए हैं। काफी संख्या में जाट रेलवे ट्रैक पर भी पहुंच गए हैं। काफी संख्या में जाट रेलवे लाइन पर पहुंच गए हैं। कैथल में देवबन कैंची गांव में जाट कैथल-पानीपत और कैथल-जींद स्टेट हाइवे के एकदम करीब धरना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने उन्हें पहले जाखोली में धरना देना की अनुमति दी थी, लेकिन वे देवबन कैंची गांव में धरना पर बैठ गए। प्रशासन का कहना है कि इसके लिए अनुमति नहीं दी गई है और यह गैरकानूनी है। इसके लिए उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मय्यड़ और रामायण गांव के पास रेलवे ट्रैक पर जमा जाट।
रोहतक के जसिया में धरना, भारी संख्या में जुटे लाेग
रोहतक में धरनास्थल जसिया गांव में सैकड़ों की संख्या में लोग धरना दे रहे है। इनमें काफी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी हैं। रोहतक शहर में भी भारी पुलिस बल और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान तैनात हैं। पूरे शहर की नोकबंदी कर दी गई है। इसी तरह कैथल, जींद अौर अन्य जिलों में जाट अांदोलनकारी धरनास्थल पर जमा हैं। धरना स्थलाें के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

राेहतक के जसिया गांव में धरने पर बैठे जाट आंदोलनकारी।
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जाटों को सड़कों और हाइवे से दूर रखने के लिए पुलिस और अर्द्ध सैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं। हाइवे और संपर्क सड़कों पर नाके लगाकर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। पानीपत जिले में भी कड़ी सुरक्षा है। जीटी रोड पर यातायात सामान्य बनाए रखने और जाट आंदोलन कारियाें को दूर रखने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात हैं। समालखा और अन्य जगहों पर नाके लगाकर पुलिस तैनात है। हिसार-दिल्ली और रोहतक दिल्ली हाइवे पर भी नाके लगाए गए हैं।
देखें तस्वीरें : जाट आंदोलन शुरू, हिसार में रेलवे ट्रैक पर पहुुंचे
मय्यड़ में रेलवे लाइन के पास धरना किया शुरू
हिसार में जाट नेता मय्यड़ में हिसार-दिल्ली हाइवे के किनारे धरना शुरू करने पर अड़ गए, लेकिन प्रशासन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। प्रशासन का कहना है कि वे गांव के स्टेडियम में धरना दें, लेकिन जाट नेता इससे मना कर रहे हैं। बाद में सैंकड़ों की संख्या में जाट जीटी रोड के करीब रामायण गांव रोड पर जमा हो गए। कई घंटों की गहमागहमी के बाद जाट रेलवे ट्रैक के करीब पहुंच गए और ट्रैक से 100 मीटर की दूरी पर एक खेत मेें धरना शुरू कर दिया।

हिसार के मय्यड़ में धरना देने के लिए रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे जाट।
जाट नेताओं का कहना है कि वे या तो हिसार-दिल्ली हाइवे के किनारे धरना देंगे या रेलवे ट्रैक के किनारे। इससे माहौल तनाव पूर्ण हो गया है। जाट नेता हाइवे के पास खड़े हैं अौर भारी संख्या में पुलिस बल ने भी मोर्चा संभाल रखा है। जाट नेता अभी और लोगों के आने का इंतजार कर रहे हैं। वहां प्रशासनिक अौर पुलिस के आला अधिकारी भी मौजूद हैं।
सिरसा, भिवानी में भी धरना शुरू
सिरसा, भिवानी, चरखी दादरी में भी जाटों का धरना शुरू हो गया है। भिवानी में यशपाल मलिक गुट का धरना शुरू हेा गया है। यहां जींद रोड पर धनाना गांव में धरना दिया जा रहा है। डीएसपी विजय देशवाल ने धरनास्थल पर पहुंच कर आंदोलनकर्मियों से की शांति की अपील की।
कैथल में स्टेट हाइवे के पास शुरू किया धरना
कैथल में धरनास्थल को लेकर जाट नेताओं और प्रशासन के बीच विवाद बना रहा। जाट नेता और प्रशासन के बीच बातचीत चली लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जाट शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने का आश्वासन देकर देवबन कैंची पर ही बैठना चाहते थे। प्रशासन ने उन्हें जाखोली में सात दिन तक धरना देने की अनुमति दी थी। लेकिन देवबन कैंची में सैकड़ों की संख्या में जाट जमा हो गए। बाद में प्रशासन ने इसकी अनुमति दे दी। वहां सैकड़ों की संख्या में जाट धरना दे रहे हैं। माैके पर भारी पुलिस बल मौजूद है।
देखें तस्वीरें : हरियाणा में जाट आंदोलन पर पुलिस की कड़ी नजर
अशोक तंवर भी कैथल में धरनास्थल पर पहुंचे
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अशोक तंवर घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने जाट समाज के धरने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जिसका हक़ है उसको मिलना ही चाहिए। प्रशासन ने लोगों की निजी ज़मीन पर कब्ज़ा किया है। वे अपनी ज़मीन पर बैठना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है। तंवर ने कहा कि सरकार हर वर्ग के साथ अन्याय कर रही है। भाजपा ने वोटबैंक के लिए लोगों को आपस में लड़ाने का काम किया है।

कैथल में देवबन कैंची गांव में हाइवे के पास धरना पर बैठे जाट।
जींद, नरवाना में भी कड़ी सुरक्षा के बीच आंदोलन
जींद, नरवाना ने भी भारी संख्या में पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलाें के जवान तैनात हैं। जींद में जाट आंदोलनकारी इक्कस गांव में धरना दे रहे हैं। चंडीगढ़-हिसार हाइवे पर कड़ी निगरानी की जा रही है। जींद-पानीपत मार्ग से भी आंदोलनकारियों को दूर रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। झज्जर के राशलवाला चौक पर जाट न्याय धरना दिया जा रहा है। धरना हवन यज्ञ के बाद शुरू किया गया। धरनास्थल और आसपास के क्षेत्र भारी पुलिस बल तैनात है।

जींद के इक्कस गांव धरना देते जाट आंदोलनकारी।
कुरुक्षेत्र के जैनुपर जाटान और पानीपत के उग्राखेड़ी में धरना
जैनपुर जाटान गांव में जाटों के जिला स्तरीय धरने के लिए प्रशासन ने शपथ पत्र देने के बाद दी रविवार को धरने की अनुमति दे दी। वहां सुबह से जाटों को धरना चल रहा है। प्रशासन ने शपथ पत्र में लिखवाया कि धरने के दौरान किसी भी तोड़फोड़, नुकसान व घटना की जिम्मेदारी संघर्ष समिति की होगी।
दूसरी ओर, पानीपत में जाट उग्राखेड़ी गांव में धरना दे रहे हैं। धरनास्थल और अासपास के क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा की गई है। पानीपत शहर में भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
राज्य के 19 जिलों में इस आंदाेलन के मद्देनजर विभिन्न शहरों में पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों ने तैनात है। राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। शनिवार को हिसार, रोहतक, कैथल, जींद सहित अधिकतर शहराें में फ्लैग मार्च हुआ। हिसार सहित संवेदनशील जिलों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर है।
जाट आंदोलन से निपटने को सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरे हालात पर नजर रखे रहे हैं। पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने कई शहरों में फ्लैग मार्च किया। रोहतक, हिसार, जींद, कैथल, भिवानी, झज्जर और सोनीपत जिलों पर खास नजर रखी जा रही है।

रोहतक में तैनात पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान।
देखें तस्वीरें: जाट आंदोलन के मद्देनजर हरियाणा में हाई अलर्ट, फ्लैग मार्च
कैथल में भी शनिवार काे पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने जिले भर में फ्लैग मार्च किया। शनिवार को चरखी दादरी जिले में भी पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों ने फ्लैग मार्च किया। जींद में भी फ्लैग मार्च हुआ। जवानों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी फ्लैग मार्च किया। आज पूरे जिले में अर्द्ध सैनिक बलाें और पुलिस का पहरा है।
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बता दें कि पिछले साल फरवरी में हुए जाट आंदोलन के दौरान 30 लोगों की मौत हो गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ। संवेदनशील जिलों में अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनियों के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स, हरियाणा पुलिस और सात हजार से अधिक होमगार्डों ने मोर्चा संभाला है।

कैथल में तैनात पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलाें के जवान।
दिल्ली को जलापूर्ति करने वाली मूनक नहर की सुरक्षा बढ़ाते हुए रेलवे टै्रक और हाईवे पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई है। सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है। हर रोज सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां पहले ही रद की जा चुकी हैं।
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सरकार ने उठाए कदम
-गांवों में शांति कमेटियों का गठन, धरना स्थलों की वीडियोग्राफी होगी।
-पेट्रोल पंपों पर खुले रूप में पेट्रोल व डीजल सहित अन्य ज्वलनशील पदार्थ बेचने पर प्रतिबंध।
-टीवी चैनल व केबल पर धरना प्रदर्शन से संबंधित किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक भाषा व चलचित्र के प्रसारण पर रोक।
-राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन, बिजली स्टेशन तथा अन्य सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध। इनके पास धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं।
-पंच-सरपंचों की सहायता से लोगों को समझाएंगे डीसी व एसपी।
-एचसीएस अधिकारियों के अलावा जिला राजस्व अधिकारी, डीडीपीओ, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों एवं बीडीपीओ को गांवों में तैनात किया।
-कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धरना स्थलों पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात।
-प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अफवाह फैलाने पर कानूनी कार्रवाई।
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-सोशल मीडिया पर रखी जा रही नजर। आपत्तिजनक व भड़काऊ भाषा के इस्तेमाल पर कार्रवाई।
-सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान होने पर आंदोलनकारियों से होगी भरपाई।
-कानून का उल्लंघन हुआ तो धारा 120 बी के तहत दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
-भीड़ में मौजूद सभी व्यक्ति चाहे वे आंदोलन से जुड़े न हों तो भी उन्हें दोषी माना जाएगा।
-भीड़ व दंगाइयों द्वारा प्रयोग किए गए वाहन का मालिक व चालक भी दोषी माने जाएंगे चाहे वे मौके पर न हों।
-साउंड सिस्टम लगाने और लंंगर चलाने वालों पर भी होगी कार्रवाई।
- मूनक और पिचौलिया हेड पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती।
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पानीपत के समालखा में तैनात पुलिसकर्मी।
कानून का उल्लंघन किया तो होगी सख्ती
जाट आंदोलनकारियों से निपटने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बीच शनिवार को पुलिस महानिदेशक डॉ. केपी सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक ली। सचिवालय में करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में एडीजीपी व आइजी लेवल के अधिकारियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति बनाई।
डीजीपी ने पूरी स्थिति पर रिपोर्ट लेने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने अधीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों से तालमेल बनाए रखें। समय-समय पर रिपोर्ट लेकर ऊपर भेजें। व्यवस्था में अगर कहीं झोल है तो इसे तुरंत दुरुस्त किया जाए। अगर कहीं हालात बिगड़ते हैं तो आंदोलनकारियों से सख्ती से निपटा जाए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति कानून के दायरे में रहकर अपनी बात कहेगा, उसका स्वागत किया जाएगा। तोडफ़ोड़ और गैर कानूनी काम बर्दाश्त नहीं होंगे।
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'' पिछले साल आंदोलन में जान गंवाने वाले 30 लोगों के आश्रितों को 15 दिन मेें नौकरी देने का सरकार का वादा छलावे के सिवाय कुछ नहीं। जाट आरक्षण हमारा मुद्दा नहीं है। इस पर न्यायालय का फैसला हमें मंजूर होगा, लेकिन जिन छह मुद्दों पर सरकार ने वार्ताएं की थी, उन पर खरा उतरना चाहिए। केंद्र में आरक्षण के लिए आज तक वेंकैया नायडू कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई। न ही जेलों में बंद निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए गए। अब मांगें पूरी होने तक हमारा शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
- यशपाल मलिक, अध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति।
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'' आंदोलन को राजनीतिक रूप देना निंदनीय है और यह जाट समाज के हित में नहीं। सरकार जाट समाज के हित में खड़ी नजर आ रही है। यशपाल मलिक बाहरी आदमी हैैं और वे प्रदेश की जनता को बरगला रहे हैं। हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे समाज में भाईचारे में खटास आए।
- हवा सिंह सांगवान, संयोजक, जाट आरक्षण संघर्ष समिति।
