हरियाणा में बदल गए नियम, उद्योग लगाने की अनुमति लेना आसान; दूसरे कामों के लिए नहीं होगा जमीन का इस्तेमाल
हरियाणा सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब आवेदक ऑनलाइन स्व-प्रमाणन के माध्यम से आसानी से अनुमति प्राप्त कर सकेंगे।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। फाइल फोटो
HighLights
औद्योगिक भूमि उपयोग के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन व्यवस्था लागू।
गलत जानकारी देने पर अनुमति अमान्य, आवेदक की जिम्मेदारी तय।
1965 के नियम में संशोधन से प्रक्रिया हुई सरल।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में उद्योग लगाने के लिए जमीन के इस्तेमाल की अनुमति लेने की प्रक्रिया आसान होगी। राज्य सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आनलाइन स्व-प्रमाणन की व्यवस्था की है।
इसके तहत आवेदक अपनी जानकारी, जरूरी दस्तावेज और निर्धारित शर्तों से जुड़े प्रमाण खुद प्रस्तुत कर सकेगा। इस प्रक्रिया के तहत मिलने वाली अनुमति को नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक की ओर से दी गई अनुमति के बराबर माना जाएगा।
हरियाणा सरकार ने स्व-प्रमाणन के साथ आवेदक की जिम्मेदारी भी तय की है। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है, जरूरी तथ्य छिपाता है या भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर अनुमति प्राप्त करता है, तो वह अनुमति शुरू से ही अमान्य मानी जाएगी।
उद्यमियों के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया सरल
संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जमीन या भवन का इस्तेमाल संबंधित क्षेत्र की विकास योजना में निर्धारित प्रमुख भूमि उपयोग के अनुरूप होना चाहिए। औद्योगिक अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि जमीन का इस्तेमाल किसी भी दूसरे काम के लिए किया जा सकता है।
हरियाणा सरकार ने इस संबंध में पंजाब अनुसूचित सड़कों तथा नियंत्रित क्षेत्रों में अनियमित विकास पर रोक संबंधी नियम 1965 में संशोधन किया है। इससे उद्योग लगाने के इच्छुक कारोबारियों और उद्यमियों के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है।
स्व-प्रमाणन का मतलब है कि आवेदक अपनी ओर से दी गई जानकारी और दस्तावेजों की सत्यता की जिम्मेदारी खुद लेगा।
