सरकारी भुगतान में देरी पर हरियाणा सरकार का सख्त रुख, कंपनियों को मिलेगा ब्याज; जिम्मेदार अधिकारी से होगी वसूली
हरियाणा सरकार ने सरकारी भुगतानों में अनावश्यक देरी पर सख्ती दिखाते हुए निर्देश दिए हैं कि विलंबित अवधि का ब्याज कंपनियों, फर्मों और ठेकेदारों को दिया जाए।
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सरकारी भुगतान में देरी पर ब्याज, जिम्मेदार अधिकारी से होगी वसूली।
HighLights
भुगतान में देरी पर कंपनियों, फर्मों को मिलेगा विलंबित अवधि का ब्याज
देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी से ब्याज राशि की होगी वसूली
समयबद्ध भुगतान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और जवाबदेही होगी तय
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सरकारी भुगतान में अनावश्यक देरी पर सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए हैं कि विभागीय स्तर पर भुगतान में देरी होने पर कंपनियों, फर्मों और ठेकेदारों को विलंबित अवधि का ब्याज दिया जाए।
इसके लिए वित्त विभाग को स्पष्ट प्रक्रिया और जवाबदेही तय करते हुए योजना तैयार करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में विभिन्न विभागों की ‘गुड प्रेक्टिसिज’ (अच्छे कार्यों) की समीक्षा के दौरान कहा कि विभागों की जिम्मेदारी है कि विकास कार्यों और परियोजनाओं से जुड़े भुगतान समय पर किए जाएं। अनावश्यक देरी का वित्तीय भार संबंधित फर्म या ठेकेदार पर नहीं पड़ना चाहिए।
सीएम ने यह दिए प्रमुख निर्देश
देरी पर ब्याज: विभागीय स्तर पर भुगतान में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित कंपनी, फर्म या ठेकेदार को देरी की अवधि का ब्याज देने का प्रविधान किया जाएगा।
अधिकारी की जवाबदेही: यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की वजह से भुगतान में देरी होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से ब्याज राशि की वसूली का प्रविधान योजना में शामिल किया जाएगा।
समयबद्ध भुगतान: भुगतान मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट प्रक्रिया, जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल भुगतान पर जोर: राज्य में बिलों के डिजिटल प्रसंस्करण, ई-वाउचर और केंद्रीकृत ई-बिलिंग की व्यवस्था लागू है। वेतन प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन की गई है।
डिजिटल सुरक्षा: डिजिटल सिग्नेचर और डांगल के दुरुपयोग की स्थिति में जिम्मेदारी तय होगी। सरकारी नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारी से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों को सीधे वेतन: एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों का वेतन ठेकेदार को देने की बजाय सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
कागजरहित प्रक्रिया: मई 2026 से ‘एसएनए स्पर्श’ के तहत केंद्र प्रायोजित योजनाओं में कागजरहित वेतन प्रक्रिया लागू की गई है।
चार हजार करोड़ के कार्य परिणाम आधारित
वित्त एवं योजना विभाग की ‘गुड प्रेक्टिसिज’ के तहत एसपीवी-अर्जुन काउंसिल के माध्यम से नौ बड़े विभागों के बजट और कार्यों की निगरानी तथा स्वतंत्र सत्यापन किया जा रहा है। करीब चार हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों को परिणाम आधारित बनाया गया है।
निर्धारित परिणामों के स्वतंत्र सत्यापन के बाद ही धनराशि जारी करने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों में विशेषज्ञ नियुक्त करने के निर्देश भी दिए।
स्वच्छ हवा के लिए राज्यों के साझा मंच का प्रस्ताव
बैठक में सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए मुख्यमंत्रियों का साझा स्वच्छ वायु मंच बनाने की परिकल्पना की गई है।
ई-स्टांपिंग और ऑनलाइन व्यवस्था
हरियाणा में ई-स्टांपिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भी बैठक में प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। वित्त विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में 62,39,868 ई-स्टांप प्रमाणपत्र जारी हुए, जिनकी कुल राशि करीब 13,64,965 लाख रुपये रही। वहीं, राज्य के सभी प्रकार के बिलों के डिजिटल प्रसंस्करण और ई-कुबेर के जरिए भुगतान की व्यवस्था लागू है।
