मेवात में खोई जमीन तलाशने में जुटी इनेलो, 27 सितंबर को नूंह में होगी 'सम्मान दिवस रैली'
इनेलो मेवात में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत अभय चौटाला 27 सितंबर को नूंह में 'सम्मान दिवस रैली' करेंगे।
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मेवात में खोई जमीन तलाशने में जुटी इनेलो (फाइल फोटो)
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में मेवात (नूंह) ऐसा इलाका है, जहां चुनावी गणित केवल विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं रहता। नूंह जिले की तीन विधानसभा सीटें नूंह, फिरोजपुर झिरका और पुन्हाना लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में अलग राजनीतिक धुरी बनाती रही हैं।
इसी इलाके में कभी पांच बार के मुख्यमंत्री रहे स्व. ओमप्रकाश चौटाला और इनेलो का मजबूत प्रभाव था। अब इनेलो उसी पुराने राजनीतिक संपर्क और संगठनात्मक आधार को नए सिरे से टटोलने की तैयारी में है।
इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने देवीलाल की 113वीं जयंती पर 27 सितंबर को नूंह में सम्मान दिवस रैली करने का फैसला किया है। तारीख में बदलाव भी मेवात की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। पहले रैली 25 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन जुमे की नमाज को देखते हुए इसे 27 सितंबर कर दिया गया।
इस रैली की तैयारी के लिए अभय चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा प्रदेश के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में जाने की योजना बना रहे हैं। पहले चरण में 24 अगस्त तक 12 जिलों के 46 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने का लक्ष्य है।
इनेलो के लिए यह अपने पुराने कार्यकर्ताओं को फिर सक्रिय करने, स्थानीय नेटवर्क को परखने और यह देखने की कवायद भी है कि पार्टी के पक्ष में अब भी कितना पारंपरिक जनाधार बचा है।
मेवात में कांग्रेस का मजबूत किला
2024 के विधानसभा चुनाव में नूंह जिले की तीनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। नूंह में आफताब अहमद को 91,833 वोट मिले, जबकि इनेलो के ताहिर हुसैन को 44,870 वोट मिले। यानी हार के बावजूद इनेलो यहां करीब 29 प्रतिशत मत हासिल करने में सफल रही।
फिरोजपुर झिरका में कांग्रेस के मामन खान ने 1,30,497 वोट लेकर बड़ी जीत दर्ज की, जबकि इनेलो के मोहम्मद हबीब को 15,638 वोट मिले। पुन्हाना में कांग्रेस के मोहम्मद इलियास 85,300 वोट लेकर जीते और इनेलो प्रत्याशी को महज 289 वोट मिले।
यही आंकड़े मेवात की मौजूदा तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने रखते हैं। नूंह में इनेलो की मौजूदगी कमजोर होने के बावजूद उसका वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, जबकि पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका में पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर लंबी दूरी तय करनी होगी।
मेवात में स्थिर नहीं हैं राजनीतिक समीकरण
मेवात में राजनीतिक समीकरण स्थिर नहीं हैं। 2024 में कांग्रेस ने नूंह की तीनों सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की थी। वहीं हथीन से मोहम्मद इसराइल भी कांग्रेस के टिकट पर जीते।
राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों के भाजपा के पक्ष में जाने से इन इलाकों में राजनीतिक चर्चाओं का रुख बदला है। ऐसे में भाजपा भी मेवात में अपने राजनीतिक विस्तार की संभावना तलाश रही है।
देवीलाल की विरासत बनाम नई पीढ़ी की राजनीति
इनेलो के लिए मेवात में वापसी की कोशिश केवल तीन विधानसभा सीटों का सवाल नहीं है। इसके पीछे देवीलाल की उस राजनीति की विरासत को फिर से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है, जिसमें ग्रामीण, किसान, मजदूर और वंचित तबकों को एक राजनीतिक मंच पर लाने का दावा किया जाता था।
1987 के विधानसभा चुनाव में देवीलाल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 90 में से रिकार्ड 85 सीटें जीती थीं और कांग्रेस सिर्फ पांच सीटों तक सिमट गई थी। आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
कांग्रेस मेवात में अपने मजबूत स्थानीय नेतृत्व के सहारे खड़ी है, भाजपा लगातार अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने में जुटी है और इनेलो अपने पुराने संगठन को पुनर्जीवित करने की चुनौती से जूझ रही है। राज्य में इस समय इनेलो के दो विधायक हैं और दोनों ही सिरसा जिले से हैं।
