जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में अब 300 कर्मचारियों वाले उद्योगों को कर्मचारियों की छंटनी, भर्ती या फिर औद्योगिक इकाई को बंद करने के लिए सरकार से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। श्रम विभाग के अधिकारी इन औद्योगिक इकाइयों की नियमित चेकिंग भी नहीं करेंगे। इसके अलावा 50 मजदूरों से काम लेने वाले ठेकेदार को लाइसेंस की जरूरत भी खत्म कर दी गई है।

100 कर्मी से अधिक वाले उद्याेगों को भर्ती, छंटनी या बंद करने के लिए पहले सरकार की मंजूरी थी जरूरी

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उद्यमियों को निवेश के लिए रिझाने की खातिर श्रम विभाग ने नियमों में यह बदलाव किया है। औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत अभी तक 100 से अधिक कर्मचारियों वाले किसी भी उद्योग को श्रमिकों की भर्ती, छंटनी, या संस्था बंद करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी पड़ती थी।

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इसी तरह ठेका अधिनियम के तहत 20 से अधिक श्रमिकों के नियोजन पर ठेकेदार को सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी था। इसका उद्देश्य श्रमिकों के हित सुरक्षित करना था। मगर अब श्रम विभाग ने दोनों नियमों में बदलाव कर दिया है। नए नियमों से 300 श्रमिकों की संख्या वाले उद्योगों पर श्रम विभाग का नियंत्रण एक तरह से खत्म हो जाएगा, वहीं 50 श्रमिकों का नियोजन करने वाले ठेकेदारों को भी मनमानी करने का रास्ता खुल गया है।

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श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी ने बदले नियमों को श्रमिकों के अनुकूल होने का दावा किया। उन्होंने श्रमिकों एवं उद्योगों को नाखून और मांस की संज्ञा देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए दोनों पक्षों के हितों की रक्षा जरूरी है। श्रम मंत्री ने कहा कि नए निर्णय से औद्योगिक इकाइयां प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित होंगी और श्रमिकों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। रही बात प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के हितों की अनदेखी की तो कहीं से भी शिकायत आती है तो त्वरित एक्शन लिया जाएगा।

असंगठित क्षेत्र में लगे 66 फीसद मजदूर

असंगठित क्षेत्र में पूरे देश में 90 फीसद और हरियाणा में करीब 66 फीसद श्रमिक कार्यरत हैं। प्रदेश में फैक्टरी एक्ट के तहत साढ़े पंद्रह हजार औद्योगिक इकाइयां पंजीकृत हैं, जबकि शॉप इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सवा दो लाख प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं। इनमें 30 लाख श्रमिक काम कर रहे हैं।

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Posted By: Sunil Kumar Jha