जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया है कि यदि सड़क दुर्घटना के चलते कोई व्यक्ति अपंग हो जाता है और उसकी आय व पेंशन पर उसका असर नहीं पड़ता तो भी वह मुआवजे का हकदार है। बीमा कंपनी इस आधार पर उसको मुआवजा देने से इन्कार नहींं कर सकती है कि दुर्घटना के बाद भी वह पहले की तरह वेतन व पेंशन का लाभ ले रहा है। हाई कोर्ट ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी उमेश की एक याचिका को स्वीकार करते हुए जारी किया।

याचिकाकर्ता ने एक्सीडेंट्स क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी थी। याची ने हाई कोर्ट में अपील दायर बताया कि एक सड़क दुर्घटना के चलते वह 75 प्रतिशत अपंग हो गया है, इसलिए उसका मुआवजा बढ़ाया जाए। इसके विरोध में बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट को बताया कि याची को मुआवजा देने का कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि सड़क दुर्घटना के बाद भी याची के वेतन व पेंशन में किसी तरह असर नहीं पड़ा है। अपने पक्ष में बीमा कंपनी ने कोर्ट के कई फैसले भी पेश किए।

हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि चाहे सड़क दुर्घटना के बाद याची की आय में कोई फर्क नहीं पड़ा हो, लेकिन उसने मानसिक व शारीरिक कष्ट झेला है। पीजीआइ रिपोर्ट में भी यह साफ हो गया है कि याची 75 प्रतिशत अपंग है और मल्टीपल इंजरी है। ऐसे में बीमा कंपनी किसी भी सूरत में मुआवजा देने से इन्कार नहीं कर सकती। हाई कोर्ट ने एक्सीडेंट्स क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा तय राशि 7,0,7750 रुपये के अलावा पांच लाख रुपये मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए देने का आदेश दिया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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