चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही भाजपा को अब लगने लगा कि सिर्फ गैर जाट मतों के बूते चुनावी वैतरणी पार नहीं की जा सकेगी। जाटों का गुस्सा ठंडा करने तथा सरकार की गलती का अहसास कराने के लिए भाजपा ने मनोहर कैबिनेट के सीनियर मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा को फील्ड में उतारा है। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में जाटों के साथ कई दौर की समझौता वार्ताएं कर चुके रामबिलास शर्मा ने जाटलैंड रोहतक में खुले तौर पर मान लिया कि सरकार हिंसा रोक पाने में सफल नहीं हो पाई थी।

संसदीय कार्य एवं शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बाद रामबिलास शर्मा हरियाणा कैबिनेट में सबसे सीनियर मंत्री हैं। उन्हें सरकार और संगठन का अच्छा खासा तुजुर्बा है। रामबिलास शर्मा ने जाट आरक्षण आंदोलन में सरकार की खामी उस समय स्वीकार की है, जब 17 अगस्त से हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र आरंभ होने वाला है। इस सत्र से पहले जाटों ने रोहतक में डेरा डालने का ऐलान कर रखा है।

प्रो. रामबिलास का यह बयान उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की उस रिपोर्ट पर भी मुहर लगाने के लिए काफी है, जिसमें उन्होंने सरकार की विफलता को उजागर किया था। दरअसल, रामबिलास के इस बयान को उनका निजी बयान कम और पार्टी लाइन की राय अधिक मानी जा रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन ने यह मान लिया है कि अकेले गैर जाट मतों के बूते दोबारा सत्ता में लौटना न केवल मुश्किल है, बल्कि जाट बाहुल्य इस प्रदेश में जाटों की अनदेखी भी कतई उचित नहीं है।

हरियाणा भाजपा के पास हालांकि जाट नेताओं की कमी नहीं है। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला जाट समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रो. रामबिलास के बजाय यदि जाट समुदाय के यह नेता आरक्षण आंदोलन की हिंसा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते तो इसके गलत अर्थ निकाले जाते। इसलिए जाटों खासकर हुड्डा के गढ़ रोहतक में रामबिलास को पूरी प्लानिंग के तहत भेजा गया, ताकि वे जाटों तक यह संदेश पहुंचाने में कामयाब हो सकें कि भाजपा जाटों के बिना अपनी मंजिल को अधूरी मानती है।

जाट नेताओं की हार के सर्वे ने किया भाजपा को चौकन्ना

हरियाणा में पिछले दिनों हुआ एक सर्वे सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस सर्वे में दिखाया गया है कि जाति विशेष के अधिकतर नेताओं की चुनावी राह इस बार कांटों भरी है। भाजपा ने हालांकि इस सर्वे को उलूल-जुलूल और तथ्यहीन करार दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन हो रहा कि सिर्फ गैर जाट मतों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना न केवल मुश्किल हो सकता है, बल्कि कई ऐसे नए जाट चेहरे चुनाव मैदान में उतारे जाएं, जो गैर विवादित हों। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने जाटों का भरोसा जीतने की कवायद शुरू की है।

जाट नेता यशपाल मलिक को हरियाणा से दूर रखने की तैयारी

हरियाणा में वर्ष 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में जहां 32 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं कई हजार करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था। प्रदेश सरकार सभी पीड़ित परिवारों को नौकरी तथा मुआवजा दे चुकी है। जाटों ने फिर से आरक्षण आंदोलन का ऐलान कर दिया है। 16 अगस्त को यह आंदोलन दोबारा रोहतक से शुरू होने जा रहा है। हालांकि भाजपा चाहती है कि जाट नेता यशपाल मलिक को येन-केन-प्रकारेण हरियाणा के चुनावी समर से दूर रखा जाए। प्रो. रामबिलास शर्मा रोहतक में इस बात का संकेत दे चुके कि जल्द ही मलिक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt