हरियाणा राज्य सूचना आयोग का बड़ा फैसला, अब RTI के दायरे में रजिस्ट्रार की पहुंच वाले सहकारी समितियों के रिकॉर्ड
हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने आदेश दिया है कि यदि रजिस्ट्रार सहकारी समितियों की किसी संस्था के रिकॉर्ड तक वैधानिक ...और पढ़ें

अब RTI के दायरे में रजिस्ट्रार की पहुंच वाले सहकारी समितियों के रिकॉर्ड (फाइल फोटो)
HighLights
रजिस्ट्रार की पहुंच वाले रिकॉर्ड आरटीआई के तहत उपलब्ध।
पंचकूला सोसायटी को 30 दिन में वीडियो रिकॉर्डिंग देने का आदेश।
यह फैसला 30 हजार सहकारी सोसायटियों को प्रभावित करेगा।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने राज्य की करीब 30 हजार सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों पर प्रभाव डालने वाला एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी सहकारी संस्था से संबंधित रिकार्ड तक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां की वैधानिक पहुंच है, तो वह सूचना आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी जा सकती है।
आयोग ने पंचकूला की हाई प्रोफाइल द न्यू हरियाणा आफिसर्स कोआपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी से जुड़ी जनरल बाडी मीटिंग की पूरी अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मामला कुलदीप जैन द्वारा दाखिल आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक ने 5 सितंबर 2023 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर 8 जुलाई 2023 को आयोजित जनरल बाडी मीटिंग की वीडियो रिकार्डिंग, कार्यवाही की प्रति और अन्य संबंधित जानकारी मांगी थी।
आवेदन पर समय पर सूचना नहीं मिलने के बाद प्रथम अपील दायर
आरटीआई आवेदन पर समय पर सूचना नहीं मिलने के बाद उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला हरियाणा राज्य सूचना आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान संयुक्त रजिस्ट्रार-सह-राज्य लोक सूचना अधिकारी की ओर से कहा गया कि संबंधित हाउसिंग सोसायटी कोई पब्लिक अथारिटी नहीं है, इसलिए उस पर आरटीआई अधिनियम लागू नहीं होता।
सोसायटी की ओर से यह भी दलील दी गई कि मांगी गई वीडियो रिकॉर्डिंग निजी रिकार्ड है और इसे साझा करने का कोई दायित्व नहीं बनता। राज्य सूचना आयुक्त डा अजय कुमार सूरा ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि आरटीआई कानून की धारा 2(एफ) के तहत “सूचना” की परिभाषा काफी व्यापक है। यदि किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के पास किसी रिकार्ड तक पहुंचने या उसे प्राप्त करने की वैधानिक शक्ति है, तो वह सूचना आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई जा सकती है।
आयोग ने अपने आदेश में हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम, 1984 की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि रजिस्ट्रार सहकारी समितियां को सोसायटी के रिकार्ड मंगाने, जांच करने, निरीक्षण करने और प्रशासनिक निगरानी रखने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि विभाग के पास वीडियो रिकार्डिंग तक पहुंच नहीं है।
सुनवाई के दौरान आयोग के सामने रखा गया तथ्य
सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि 8 जुलाई 2023 की विवादित जनरल बाडी मीटिंग रजिस्ट्रार कार्यालय के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी। इतना ही नहीं, बैठक में अतिरिक्त रजिस्ट्रार स्तर की अधिकारी भी मौजूद थीं। आयोग ने माना कि जब बैठक सरकारी निगरानी और निर्देशों के तहत हुई हो, तो उसकी रिकार्डिंग को पूरी तरह निजी दस्तावेज नहीं माना जा सकता।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि ऐसी संस्थाएं जो सरकारी नियंत्रण, निगरानी या वैधानिक ढांचे के अधीन कार्य करती हैं, उनसे संबंधित सूचना को पूर्णत निजी नहीं माना जा सकता।
अपने आदेश में आयोग ने एसपीआईओ-कम-ज्वाइंट रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां हरियाणा को निर्देश दिया कि वे संबंधित सोसायटी से पूरी उपलब्ध अनएडिटेड वीडियो रिकार्डिंग हासिल कर 30 दिनों के भीतर आवेदक को उपलब्ध कराएं।
साथ ही आदेश में स्पष्ट कहा गया कि यदि सोसायटी रिकार्ड देने से इन्कार करती है, तो उसके खिलाफ हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम के तहत उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
