ईओ और एसओ पर दबाव बना खुलवाए IDFC फर्स्ट बैंक में खाते, पंचकूला निगम के तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह पर आरोप
पंचकूला नगर निगम और कालका नगर परिषद के करोड़ों के कथित घोटाले में तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह पर बड़ा खुलासा ...और पढ़ें

पंचकूला निगम और कालका परिषद के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े खातों में हुई हेराफेरी। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
सेक्शन ऑफिसर को कार्यालय बुलाकर लगाई थी फटकार।
पंचकूला निगम और कालका परिषद के फंड में धोखाधड़ी।
एफडी के नाम पर बैंक अधिकारियों संग साजिश रची।
राजेश मलकानियां, पंचकूला। पंचकूला नगर निगम और कालका नगर परिषद के बैंक खातों में हुए करोड़ों के कथित घोटाले में तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह बात सामने आई है कि उन्होंने ईओ और एसओ पर दबाव बनाकर चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाए थे।
नगर निगम के सेक्शन ऑफिसर अनिल कुमार ने एफडी के लिए अलग-अलग बैंकों से कोटेशन आमंत्रित करने का सुझाव दिया था। तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर फटकार लगाई थी और बाद में 11 नवंबर 2025 को उन्हें निगम से हटाने का आदेश जारी कर दिया था।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस आदेश का मसौदा निजी आरोपित नरेश कुमार ने बैंक के पूर्व कर्मचारी अभय कुमार के साथ साझा किया था, जिसे सीबीआई ने कथित साजिश की कड़ी के रूप में दर्ज किया है।
कालका परिषद में भी इसी बैंक की शाखा में खाता खुलवाने का आरोप
इतना ही नहीं नगर परिषद कालका से जुड़े मामले में जांच के अनुसार, 23 अक्टूबर 2025 को बैंक का प्रस्ताव परिषद कार्यालय के बजाय पंचकूला में कमिश्नर के निजी सहायक के कार्यालय पहुंचा।
आरोप है कि कमिश्नर आरके सिंह ने प्रस्ताव पर कार्रवाई के निर्देश दिए और कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से यह प्रस्ताव सौंपकर चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में खाता खुलवाने के लिए कहा।
यह शाखा कालका से लगभग 30 किलोमीटर दूर बताई गई है, जबकि नजदीकी शाखा उपलब्ध थी। जांच में कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने तत्कालीन जिला नगर आयुक्त के दबाव में प्रस्ताव पर कार्रवाई की।
रिकाॅर्ड के मुताबिक, इससे पहले नगर परिषद ने कभी एफडी नहीं कराई थी। जांच में सबसे गंभीर आरोप नगर परिषद कालका के खाते से 18 करोड़ 46 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
बैंक अधिकारियों संग मिलकर रची साजिश
तत्कालीन कमिश्नर राम कुमार सिंह पर आरोपों के मुताबिक, फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) कराने के नाम पर बैंक अधिकारियों और निजी बिचौलियों के साथ मिलकर साजिश रची गई। इस पूरे मामले में तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह की भूमिका नगर निगम पंचकूला के साथ-साथ नगर परिषद कालका में भी सामने आई है।
एक बैंक, शाखा और बयाज दर अलग-अलग
जांच में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर 2025 को अभय कुमार तत्कालीन कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे थे। उसी दिन दोपहर 2:10 बजे उन्होंने व्हाट्सऐप संदेश भेजकर स्वयं को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर बताया। इसी दिन बैंक की ओर से नगर निगम को 8.60 प्रतिशत ब्याज दर पर एफडी कराने का प्रस्ताव भेजा गया।
आरके सिंह ने इस प्रस्ताव को तत्कालीन वरिष्ठ लेखा अधिकारी के पास भेजते हुए लिखा कि बैंक 8.60 प्रतिशत ब्याज दे रहा है, इसलिए मामले को तुरंत प्रस्तुत किया जाए। जांच में यह भी उल्लेख है कि संबंधित बैंक ने लगभग 15 दिनों के भीतर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश की थी।
इनमें 17 अक्टूबर को 8.60 प्रतिशत, 23 अक्टूबर को 7.50 प्रतिशत और 31 अक्टूबर को 7.60 प्रतिशत की दर शामिल थी। वहीं, बैंक की सेक्टर-11 पंचकूला शाखा की ओर से 6.45 प्रतिशत की दर बताई गई थी।
चेकबुक मिलने से पहले के चेक पर हस्ताक्षर करने का आरोप
मामले में एक महत्वपूर्ण आरोप यह है कि तत्कालीन कमिश्नर ने 31 अक्टूबर 2025 की तारीख वाले पांच चेक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पक्ष में हस्ताक्षरित किए थे। इन चेकों के पीछे ‘फार एफडीआर’ लिखा गया था।
जबकि जांच में प्रस्तुत रिकार्ड के मुताबिक, संबंधित चेकबुक विभाग को 3 नवंबर 2025 को मिली थी और बैंक में पहली रकम भी इसी तारीख को जमा हुई थी। इसके अलावा, 24 दिसंबर 2025 को कमिश्नर द्वारा अपने आवास पर निजी व्यक्ति नरेश कुमार को चार अन्य चेक सौंपने का आरोप है।
कमिश्नर के घर 50 लाख और बेटे तक 2 करोड़ पहुंचाने का आरोप
जांच में कथित अनुचित लाभ के लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि 11 जनवरी 2026 को 50 लाख रुपये कमिश्नर के आवास से एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद यह रकम चंडीगढ़ के सेक्टर-19ए स्थित मकान नंबर 105 पर पहुंचाई गई।
इसके अलावा, जांच में दावा किया गया है कि 22 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ से 2 करोड़ रुपये एकत्र कर हवाला के माध्यम से दिल्ली पहुंचाए गए। यह रकम तीन किस्तों में कमिश्नर के बेटे प्रशांत को दिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी ने इस संबंध में कथित रसीदों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप चैट को साक्ष्य के रूप में दर्ज किया है।
