IAS प्रदीप डागर के फैसले से HSPCB को 159.85 करोड़ की चपत, CBI के आरोप पत्र में खुलासा
आईएएस प्रदीप डागर के फैसलों से हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 159.85 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई ...और पढ़ें

सीबीआई के आरोपपत्र में आईएएस प्रदीप डागर पर गंभीर आरोप।
HighLights
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को लाभ पहुंचाने का आरोप।
दरों में छेड़छाड़ की, खुद तुलनात्मक रेट चार्ट तैयार किए।
वित्त विभाग की 50 करोड़ की सीमा का बार-बार उल्लंघन।
राजेश मलकानियां, पंचकूला। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के फंड को बैंकों में फिक्स्ड डिपाॅजिट के रूप में लगाने के मामले में तत्कालीन सदस्य सचिव आईएएस प्रदीप कुमार डागर के निर्णयों से बोर्ड को लगभग 159.85 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
दस्तावेज के अनुसार, डागर ने निवेश के विभिन्न चरणों में खुद तुलनात्मक रेट चार्ट तैयार किए और कई मौकों पर ऐसे तरीके अपनाए, जिनसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को निवेश हासिल करने का अवसर मिला।
सीबीआई के आरोपपत्र में बोर्ड को कुल 1,59,85,95,089 रुपये के नुकसान का उल्लेख है, जिसमें 43,80,962 रुपये ब्याज का नुकसान शामिल है। जांच दस्तावेज के मुताबिक, वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के निर्देशों में पहली बार पैनल में शामिल बैंक के लिए 50 करोड़ रुपये की सीमा निर्धारित थी।
आरोप है कि प्रदीप डागर ने निवेश के पहले चरण में इस शर्त को नोट किया था और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ रुपये लगाने की सिफारिश की। इसी आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्हें बैंक की निर्धारित सीमा की पूरी जानकारी थी।
जना स्माॅल फाइनेंस बैंक की दर को चार्ट में कम दिखाने का आरोप
आरोपपत्र में मार्च 2025 के निवेश चरण को महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें कहा गया है कि जना स्माल फाइनेंस बैंक ने 3 करोड़ रुपये से अधिक की जमा के लिए 8.45 प्रतिशत ब्याज दर की पेशकश की थी, जबकि डागर द्वारा तैयार चार्ट में उसकी दर 8.25 प्रतिशत दर्शाई गई।
यदि 8.45 प्रतिशत की दर दर्ज होती, तो जना स्माल फाइनेंस बैंक सबसे ऊंची दर देने वाला बैंक होता और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक पर विचार नहीं होता। इसके बावजूद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में करीब 17.90 करोड़ रुपये लगाने की सिफारिश की गई।
50 करोड़ की सीमा पार होने के बाद भी निवेश का आरोप
जुलाई 2025 के एक अन्य निवेश चरण में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ओर से 25 जून की एक कोटेशन पर विचार किया गया, जिस पर बैंक के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। इसी दौरान इंडसइंड बैंक ने भी 7.10 प्रतिशत की समान दर बताई थी।
आरोपपत्र के मुताबिक, समान ब्याज दर होने की रकम दोनों बैंकों में बराबर बांटे जाने के नियम की अनदेखी करते हुए करीब 37.78 करोड़ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में लगाने की सिफारिश की गई। इससे बैंक में कुल निवेश 105.68 करोड़ रुपये होने का उल्लेख है।
बचत खाते में 7.25 प्रतिशत ब्याज पर भी उठे सवाल
अक्टूबर 2025 में बोर्ड की 8 करोड़ की रकम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के बचत खाते में 7.25 प्रतिशत की दर पर रखने की सिफारिश की गई, जबकि सबसे अधिक वास्तविक फिक्स्ड डिपाॅजिट दर 7.02 प्रतिशत थी। इसके अलावा, हरको बैंक की 140.87 करोड़ की दो एफडी को बिना कारण पुनर्निवेश नहीं किया गया, जिससे ब्याज का नुकसान हुआ।
