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'बैंड बजा दूंगा सबकी', जमानत पर बाहर आते ही देने लगा धमकी, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने फिर जेल भेजने का दिया आदेश

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:13 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कैथल के एक हत्यारोपी की जमानत रद्द कर दी है। आरोपी पर जमानत पर बाहर ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट। सांकेतिक फोटो

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट। सांकेतिक फोटो

HighLights

  1. हत्यारोपी ने जमानत पर बाहर आकर दी धमकी।

  2. शिकायतकर्ता के परिवार को डराने का आरोप लगा।

  3. हाईकोर्ट ने अप्रिय घटना की आशंका पर जमानत रद्द की।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। जेल से बाहर आने के बाद किसी आरोपित को कानून के दायरे में रहकर ही व्यवहार करना होता है, लेकिन कैथल में हत्या के एक मामले के आरोपित पर जमानत मिलते ही शिकायतकर्ता और उसके परिवार को धमकाने का आरोप लगा।

इंटरनेट माध्यमों पर कथित तौर पर भेजे गए संदेशों में उसने लिखा, ‘बैंड बजा दूंगा इसके चक्कर में तो सबकी।’ शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें अपलोड करने और उसे संदेश भेजने के आरोप भी लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपित की जमानत रद कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे बाहर रहने देने से कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

जमानत मिलते ही शुरू हो गई कथित धमकी

जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ के समक्ष आए मामले के अनुसार, जून 2023 में कैथल में पड़ोसियों के बीच विवाद हिंसक हो गया था। इस घटना में सिर पर चोट लगने से एक घरेलू सहायक की मौत हो गई थी। हत्या के मामले में आरोपित को 28 जनवरी को नियमित जमानत मिली थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि जेल से बाहर आते ही आरोपित ने उसे और उसके परिवार को धमकाना शुरू कर दिया। आरोप है कि आरोपित के इंस्टाग्राम और फेसबुक खातों से धमकी भरे संदेश भेजे गए।

शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें भी अपलोड की गईं और उसे संदेश भेजे गए। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर 17 मार्च को एक अन्य प्राथमिकी दर्ज हुई। इस मामले में आरोपित को गिरफ्तार भी किया गया।

‘सिर्फ एक घटना’ की दलील नहीं आई काम

शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आरोपित ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हुए शिकायतकर्ता और उसके परिवार को सीधे धमकियां दीं। ऐसे में उसकी जमानत रद की जानी चाहिए। दूसरी ओर, आरोपित के वकील ने कहा कि केवल एक घटना के आधार पर जमानत रद करना उचित नहीं होगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस  अग्रवाल ने कहा कि जमानत रद करना गंभीर कदम है और इसका इस्तेमाल आसानी से नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, मौजूदा मामले में अदालत ने उपलब्ध संदेशों और परिस्थितियों को गंभीरता से लिया।

अदालत ने जताई अप्रिय घटना की आशंका

हाई कोर्ट ने कहा कि जमानत मिलने के तुरंत बाद शिकायतकर्ता और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकियां देना गंभीर विषय है। अदालत ने संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपित ने शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें अपलोड कीं और उसे संदेश भी भेजे।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के दौरान आरोपित का व्यवहार असामान्य और बातचीत अस्पष्ट पाए जाने का भी आदेश में उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारी उसकी मानसिक स्थिति की जांच करा सकते हैं।

हरियाणा सरकार को दिए कार्रवाई के निर्देश

मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपित को जमानत पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

अदालत ने 28 जनवरी को दी गई नियमित जमानत रद करते हुए हरियाणा सरकार को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।