यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 09, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जाट आंदोलन: मसले के हल की जगी उम्मीद, कुछ सरकार आगे बढ़ी तो कुछ जाट नेता
जाट आंदोलन को लेकर पैदा गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद जगी है। सरकार ने जाट आंदालनकारियों से वार्ता के लिए ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में जाट आंदोलन के मामले में रास्ता निकलने की उम्मीद जगी है। मसले के हल के लिए कुछ राज्य सरकार ने कदम बढ़ाया है तो जाट आंदोलनकारी भी एक कदम आगे बढ़ते से दिख रहे हैं। सरकार द्वारा वार्ता की पेशकश के बाद जाट नेतओं ने सशर्त ही सही लेकिन सकारात्मक रुख दिखाया है।
पिछले 12 दिन से धरना दे रहे जाट आंदोलनकारी सरकार द्वारा बनाई गई पांच सदस्यीय अफसरों की कमेटी से सशर्त वार्ता को तैयार हो गए हैैं। जाट नेताओं ने कहा है कि अफसरों से यह बातचीत न तो दिल्ली में होगी और न ही चंडीगढ़ में। उन्हाेंने कहा है कि हरियाणा में किसी भी धरना स्थल अथवा स्थान पर कमेटी के साथ बातचीत हो सकती है।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि सरकार ऐसे लोगों से बातचीत करने का नाटक कर रही है, जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। मलिक ने कहा कि सरकार ने आइएएस और आइपीएस अधिकारियों की जो पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है, हम उसके साथ बातचीत करने को तैयार है। बातचीत के लिए पांच बिंदु रखे गए हैै, जिनसे बाहर जाकर कोई बातचीत नहीं होगी।
मलिक ने बातचीत के लिए यह रखी शर्तें
1. सरकार के साथ बातचीत दिल्ली अथवा चंडीगढ़ में न होकर हरियाणा में कहीं भी होगी।
2. जो भी वार्ता होगी, वह पहले (पूर्व में हुए) समझौते का केवल प्रारूप होगी। जो भी समझौता होगा, वह धरना स्थलों पर सभी के समक्ष होगा।
3. सरकार द्वारा गठित कमेटी दूसरे गुटों से जो वार्ता कर रही है, वह पहले सभी गुटों से अपनी वार्ता पूरी कर ले। उसके बाद ही जाट आरक्षण संघर्ष समिति वार्ता करेगी
4. जो कमेटी बातचीत के लिए आए, वह पिछले साल फरवरी में हुए आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों, उनसे जुड़ी कार्रवाई और जेलों में बंद आंदोलनकारियों का पूरा रिकॉर्ड साथ लाए। कमेटी को समझौते की समय सीमा तय कर पूरा विवरण साथ लाना होगा
5. जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सभी दलों को पत्र लिखे थे। यदि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अगले चार दिनों के भीतर धरना स्थल पर नहीं पहुंचते हैैं तो जाट समाज यह समझेगा कि वे हमारी इस न्याय की लड़ाई में साथ नहीं हैैं।
बातचीत कब और कहां होगी, कमेटी तय करेगी : गृह सचिव
दूसरी तरफ, राज्य के गृह सचिव रामनिवास ने भी आंदोलनकारियों के साथ जल्द बातचीत होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय के आंदोलनकारी लोग बातचीत करने को तैयार हो गए हैैं। बातचीत कब और कहां होगी, इसे पांच सदस्यीय कमेटी जल्द तय कर लेगी। स्थान तय होते ही बातचीत का मसौदा जारी कर दिया जाएगा।
बीरेंद्र सिंह के घर शाह की डिनर पार्टी पर सवाल
यशपाल मलिक ने दिल्ली में केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के निवास पर जाट समुदाय के लोगों के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के डिनर पर भी सवाल खड़े किए हैैं। उन्होंने कहा कि ऐसी मीटिंग सिर्फ समाज को छलने से अधिक कुछ नहीं है। इस मीटिंग में हरियाणा में धरना दे रहे जाट समुदाय के एक भी व्यक्ति ने हिस्सा नहीं लिया। लिहाजा ऐसी मीटिंग का कोई औचित्य नहीं है।
सीएम को जाट आंदोलन शांतिपूर्ण निपट जाने की उम्मीद
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को जाट आंदोलन के शांतिपूर्ण ढंग से निपट जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर से आंदोलन के शांतिपूर्ण चलने की रिपोर्ट आ रही है। सभी को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात कहने का हक है। अगर कानून व्यवस्था को हाथ में लिया गया तो सरकार आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से निपटेगी। चंडीगढ़ स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही आंदोलन निपट जाएगा।
जाटों से वार्ता के लिए बनाई कमेटी में नेताओं को दूर रखने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले भी अधिकारियों की कमेटियां बनी हैं। जरूरत और मौके के हिसाब से सरकार फैसला करती है। हमें भी किसी से बातचीत करने में कोई आपत्ति नहीं है। इनेलो व कांग्रेस द्वारा जाटों के आंदोलन को दिए गए समर्थन से जुड़े सवाल पर मनोहर लाल ने कहा कि विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
