जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज और पुलिस महानिदेशक (DGP) मनोज कुमार यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके पुलिस महानिदेशक को अगले आदेश तक सेवा विस्तार देने के हरियाणा सरकार के फैसले पर गृह मंत्री अनिल विज ने सवाल उठा दिए हैं। गृह मंत्री ने मनोज यादव को पुलिस महानिदेशक के पद पर सेवा विस्तार देने को गैरवाजिब करार देते हुए गृह सचिव को आदेश दिए हैं कि वह नए पुलिस महानिदेशक के लिए लोक सेवा आयोग के पास आइपीएस अधिकारियों के नाम का नया पैनल तुरंत भेजें।

गृह मंत्री अनिल विज ने गृह सचिव को साफ शब्दों में कह दिया है कि इस कार्य में हुई देरी अथवा कानूनी दिक्कतें पैदा होने की स्थिति में सारी जिम्मेदारी उनकी होगी। पुलिस महानिदेशक मनोज यादव 1988 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं और उनका दो साल का कार्यकाल 21 फरवरी को पूरा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की हिदायतें हैं कि डीजीपी के पद पर कोई आइपीएस अधिकारी कम से कम दो साल रह सकता है। इससे ज्यादा समय के लिए नियुक्ति का अधिकार हालांकि राज्य सरकार के पास है, जिसे आधार बनाते हुए हरियाणा सरकार की ओर से गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने पिछले दिनों एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि मनोज यादव डीजीपी के पद पर नियुक्त रहते हुए अगले आदेश तक काम करते रहेंगे।

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गृह मंत्री ने गृह सचिव को लिखे पत्र में 18 फरवरी 2019 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी के पद पर मनोज यादव की नियुक्ति दो साल के लिए होगी। तब मनोज यादव ने 21 फरवरी 2019 को कार्यभार ग्रहण किया था। मनोज यादव केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर गए हुए थे। उन्होंने हरियाणा लौटने के बाद डीजीपी के पद की कमान संभाली थी। अनिल विज ने अपने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के मुताबिक मनोज यादव का डीजीपी के पद पर दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए अब उन्हें इसी पद पर आगे विस्तार देने का कोई औचित्य नहीं है।

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अनिल विज ने अपने पत्र में डीजीपी के पद पर प्रमोट होने की लाइन में लगे सात आइपीएस अधिकारियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिन आइपीएस अधिकारियों की 30 साल की सर्विस पूरी हो चुकी है तथा उनकी रिटायरमेंट में छह माह का समय बचा है, उन्हें नया डीजीपी बनने का मौका मिलना चाहिए। हरियाणा कैडर के ऐसे आइपीएस अधिकारियों की संख्या सात है, इसलिए दो मार्च 2021 को डीजीपी का पद खाली मानते हुए नई नियुक्ति के लिए आइपीएस अधिकारियों का नया पैनल लोक सेवा आयोग के पास भेजा जाना चाहिए। बता दें यदि सरकार चाहे तो डीजीपी के पद पर अधिकारी को दो साल से ज्यादा नियुक्ति दे सकती है। पंजाब में ऐसा हो चुका है। वहां के डीजीपी सुरेश अरोड़ा दो साल से ज्यादा तक डीजीपी रह चुके हैं।

क्या है डीजीपी और गृह मंत्री के बीच मतभेद की वजह

  1. गृह मंत्री मानते हैं कि डीजीपी उन्हें बाइपास कर काम करते हैं और फैसले लेते हैं
  2. हरियाणा के पुलिस थानों व चौकियों में धार्मिक स्थलों के निर्माण की जानकारी लेने व उन्हें नियमित कराने संबंधी आदेश जारी करने से नाराज हैं
  3. सीआइडी मुख्यमंत्री के पास रहेगी या गृह मंत्री के पास, तब डीजीपी अनिल विज की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे
  4. गृह मंत्री के कहने से कुछ आइपीएस के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई
  5. जिलों में एसपी की कार्य प्रणाली सुधारने को लेकर समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं हुआ
  6. डीजीपी को भी कई मामलों में लगा कि उच्चस्तरीय अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेशों पर तुरंत अमल संभव नहीं है।

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विज की चिट्ठी के बाद अब क्या हो सकती है संभावना

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने हालांकि गृह सचिव राजीव अरोड़ा को पत्र लिखकर नए डीजीपी के नामों का पैनल लोक सेवा आयोग के पास भेजने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन ऐसा हो पाएगा, इसकी संभावना हाल फिलहाल तो कम नजर आ रही है। मनोज यादव पर केंद्र सरकार में तैनात एक भारी-भरकम पावरफुल अधिकारी की कृपा दृष्टि है। उन्हीं के हस्तक्षेप पर मनोज यादव को हरियाणा वापस भेजा गया था। मनोज यादव केंद्र के साथ-साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल के भी भरोसेमंद हैं। ऐसे में यह विवाद हल होने के बजाय उलझ ज्यादा सकता है। दूसरी संभावना यह भी है कि मनोज यादव को हाल ही में केंद्र की सेवाओं में इंपेनलमेंट किया गया है। यदि मनोज यादव का ज्यादा विरोध हुआ तो वह वापस केंद्र में सेवाओं के लिए जा सकते हैं।

यादव की सेवानिवृत्ति 2025 में, कई अधिकारी दौड़ में

हरियाणा के मौजूदा डीजीपी 1988 बैच के आइपीएस मनोज यादव की सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2025 को है। 1984 बैच के आइपीएस अधिकारी एसएस देसवाल नई दिल्ली में तैनात हैं और उनकी रिटायरमेंट 31 अगस्त 2021 को इसी साल है। 1985 बैच के आइपीएस अधिकारी के सेल्वराज की रिटायरमेंट 31 जनवरी को इसी साल हो चुकी है, लेकिन सरकार ने उन्हें एक्सटेंशन दे रखी है। 1986 बैच के आइपीएस केके संधू की रिटायरमेंट 31 अगस्त 2021 को है, जबकि 1988 बैच के ही आइपीएस अधिकारी पीके अग्रवाल की रिटायरमेंट 30 अगस्त 2023 को है। 1989 बैच के आइपीएस मोहम्मद अकील की रिटायरमेंट 31 दिसंबर 2025 को है, जबकि 1989 बैच के आइपीएस आरसी मिश्रा की रिटायरमेंट 30 जून 2024 को है।

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