महाबीर था असली आरोपी, पुलिस ने हेम राज को बना दिया कातिल; हरियाणा में मौत की सजा पाए व्यक्ति को हाई कोर्ट ने किया बरी
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हिसार में ढाई साल के बच्चे की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए हेम राज को बरी कर दिया है।

हरियाणा पुलिस की जांच पर उठे सवाल, मौत की सजा पाए व्यक्ति को हाई कोर्ट ने किया बरी।
HighLights
हाई कोर्ट ने हेम राज को हत्या के आरोप से बरी किया
अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा
जांच में गंभीर कमियां और आरोपी की पहचान पर सवाल
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हिसार में करीब ढाई साल के बच्चे की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए हेम राज को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष हेम राज को हत्या से जोड़ने वाले ऐसे कानूनी रूप से स्वीकार्य और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे उसका अपराध उचित संदेह से परे साबित हो। अदालत ने जांच में गंभीर कमियां बताते हुए कहा कि मामले में आरोपी की पहचान को लेकर उठे अहम सवालों का जांच एजेंसी ने समाधान नहीं किया।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस हरमीत सिंह देओल की खंडपीठ ने मामले में सबसे पुराने दस्तावेजी साक्ष्य चाइल्डलाइन 1098 के रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना। बच्चे का शव मिलने से तीन दिन पहले दर्ज इस रिकॉर्ड में बच्चे को पीटने वाले व्यक्ति का नाम ‘महाबीर’ बताया गया था, जबकि बाद में आरोपी के रूप में हेम राज को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा कि यह अंतर महज सामान्य विसंगति नहीं बल्कि आरोपी की पहचान के मूल सवाल से जुड़ा है।
अदालत ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
अदालत ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें यह पता लगाना चाहिए था कि महाबीर कौन था, कहां रहता था और चाइल्डलाइन से किस व्यक्ति ने बातचीत कर खुद को आरोपी का भाई बताया था।
अदालत के अनुसार, इस दिशा में कोई सार्थक जांच नहीं की गई। यहां तक कि यह भी पता नहीं लगाया गया कि महाबीर कहीं हेम राज का उपनाम तो नहीं था अथवा दोनों अलग-अलग व्यक्ति थे।
मामले में 16 जून 2018 को हिसार के गैबीपुर गांव में एक बंजर खेत से करीब ढाई साल के बच्चे का सिर कटा शव बरामद हुआ था। शव के पास खोपड़ी, हड्डियों के टुकड़े और खून से सने कपड़े भी मिले थे। बरवाला थाने में हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
बच्चे की मां ने लगाया था आरोप
बच्चे की मां ने 19 जून 2018 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर आरोप लगाया था कि हेम राज ने 13 जून की रात बच्चे को सड़क पर पटककर और कुदाल से पीटकर उसकी हत्या कर दी थी। हेम राज को 20 जून को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया कि उसकी निशानदेही पर बच्चे के कपड़े और घटनास्थल के पास पड़ी कुदाल तक पहुंचने की बात सामने आई।
निचली अदालत ने मार्च 2022 में हेम राज को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए हत्या के लिए मृत्युदंड सुनाया था। मामले में मौत की सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट को संदर्भ भेजा गया था।
शव की पहचान भी संदेह से परे साबित नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि कपड़ों के अलावा शव की पहचान लापता बच्चे के रूप में साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने भी बताया था कि शरीर का केवल निचला हिस्सा उपलब्ध था, जबकि सिर, गर्दन, ऊपरी अंग और छाती का बड़ा हिस्सा गायब था।
डीएनए जांच भी नहीं दे सकी निर्णायक जवाब
फोरेंसिक प्रयोगशाला में हड्डी के नमूने से डीएनए प्रोफाइल तैयार नहीं हो सकी। इसलिए मां के रक्त नमूने से उसका मिलान भी नहीं हो पाया। अदालत ने माना कि क्षेत्र से लापता एकमात्र बच्चा होने के कारण शव संभवतः उसी का था, लेकिन इसे निश्चित रूप से साबित नहीं किया जा सका। इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने हेम राज को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हिसार में करीब ढाई साल के बच्चे की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए हेम राज को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष हेम राज को हत्या से जोड़ने वाले ऐसे कानूनी रूप से स्वीकार्य और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे उसका अपराध उचित संदेह से परे साबित हो। अदालत ने जांच में गंभीर कमियां बताते हुए कहा कि मामले में आरोपी की पहचान को लेकर उठे अहम सवालों का जांच एजेंसी ने समाधान नहीं किया।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस हरमीत सिंह देओल की खंडपीठ ने मामले में सबसे पुराने दस्तावेजी साक्ष्य चाइल्डलाइन 1098 के रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना। बच्चे का शव मिलने से तीन दिन पहले दर्ज इस रिकॉर्ड में बच्चे को पीटने वाले व्यक्ति का नाम ‘महाबीर’ बताया गया था, जबकि बाद में आरोपी के रूप में हेम राज को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा कि यह अंतर महज सामान्य विसंगति नहीं बल्कि आरोपी की पहचान के मूल सवाल से जुड़ा है।
अदालत ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
अदालत ने जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें यह पता लगाना चाहिए था कि महाबीर कौन था, कहां रहता था और चाइल्डलाइन से किस व्यक्ति ने बातचीत कर खुद को आरोपी का भाई बताया था।
अदालत के अनुसार, इस दिशा में कोई सार्थक जांच नहीं की गई। यहां तक कि यह भी पता नहीं लगाया गया कि महाबीर कहीं हेम राज का उपनाम तो नहीं था अथवा दोनों अलग-अलग व्यक्ति थे।
मामले में 16 जून 2018 को हिसार के गैबीपुर गांव में एक बंजर खेत से करीब ढाई साल के बच्चे का सिर कटा शव बरामद हुआ था। शव के पास खोपड़ी, हड्डियों के टुकड़े और खून से सने कपड़े भी मिले थे। बरवाला थाने में हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
बच्चे की मां ने लगाया था आरोप
बच्चे की मां ने 19 जून 2018 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर आरोप लगाया था कि हेम राज ने 13 जून की रात बच्चे को सड़क पर पटककर और कुदाल से पीटकर उसकी हत्या कर दी थी। हेम राज को 20 जून को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया कि उसकी निशानदेही पर बच्चे के कपड़े और घटनास्थल के पास पड़ी कुदाल तक पहुंचने की बात सामने आई।
निचली अदालत ने मार्च 2022 में हेम राज को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए हत्या के लिए मृत्युदंड सुनाया था। मामले में मौत की सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट को संदर्भ भेजा गया था।
शव की पहचान भी संदेह से परे साबित नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि कपड़ों के अलावा शव की पहचान लापता बच्चे के रूप में साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने भी बताया था कि शरीर का केवल निचला हिस्सा उपलब्ध था, जबकि सिर, गर्दन, ऊपरी अंग और छाती का बड़ा हिस्सा गायब था।
डीएनए जांच भी नहीं दे सकी निर्णायक जवाब
फोरेंसिक प्रयोगशाला में हड्डी के नमूने से डीएनए प्रोफाइल तैयार नहीं हो सकी। इसलिए मां के रक्त नमूने से उसका मिलान भी नहीं हो पाया। अदालत ने माना कि क्षेत्र से लापता एकमात्र बच्चा होने के कारण शव संभवतः उसी का था, लेकिन इसे निश्चित रूप से साबित नहीं किया जा सका। इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने हेम राज को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
