चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। Rajya Sabha Polls: हरियाणा में राज्‍यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में मतदान और फिर मतगणना के दौरान खूब हाई वोल्‍टेज ड्रामा हुआ। इसमें जीत के समीकरण अचानक बदल गए और चुनाव परिणाम भी बदल गया। राज्यसभा चुनाव में जबरदस्त खेला हो गया। करीब 12 घंटे की लंबी मशक्कत और इंतजार के बाद कांग्रेस के हाथ से  मौका खिसक गया और रीकाउंटिंग में निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने  बाजी मार ली।

एक समय जीत की ओर बढ़ते अजय माकन की हार में कुलदीप बिश्‍नोई की क्रास वोटिंग के साथ ही एक वोट के रद होना बड़ा कारण रहा। कुलदीप ने तो क्रास वो‍टिंग के बाद सरेआम यह बात कही, लेकिन कांग्रेस के लिए  अभी यह रहस्‍य है कि किस विधायक का वोट रद हुआ। बड़ी बात है कि इस विधायक ने जानबूझ कर ऐसा किया या गलती हुई ।

दरअसल कांग्रेस की एक वोट रद होने, कुलदीप बिश्‍नोई की क्रास वोटिंग तथा निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू द्वारा अपना वोट नहीं डालने की वजह से 188 मतों के आधार पर हार जीत तय की गई। रात करीब पौने तीन बजे घोषित रिजल्ट में भाजपा उम्मीदवार कृष्णलाल पंवार और भाजपा-जजपा व निर्दलीय विधायकों द्वारा समर्थित उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा चुनाव जीत गए। कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया और इस चुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल राजनीति के मास्टर माइंड बनकर सामने आए, जबकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को 'अपनों' से राजनीतिक धोखा मिल गया।

हरियाणा में राज्‍यसभा में एक वोट का वैल्‍यू 100 होती है।हरियाणा विधानसभा में बनाए गए मतदान केंद्र में 89 विधायकों की वोट पोल होने और एक विधायक का वोट रद होने के हिसाब से कृष्ण पाल पंवार को जीत के लिए 2934 वोट चाहिए थे, लेकिन उन्हें 31 वोट यानि 3100 वोट मिले। उनके हिस्से में आए अतिरिक्‍त 166 वोट निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा को चले गए।

ऐसा पंवार को मिले वोटों में दूसरी वरीयता कार्तिकेय को देने की वजह से हुआ। कार्तिकेय को 29 वोट यानि 2900 मिले थे, जबकि कांग्रेस का एक वोट रद हो जाने की वजह से माकन को भी 29 वोट यानि 2900 मिले थे। इस हिसाब से पंवार को 2934 वोट, कार्तिकेय को 2966 और माकन को 2900 वोट मिले, जिसके आधार पर पंवार और कार्तिकेय को विजयी घोषित कर दिया गया।

कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई द्वारा क्रास वोटिंग होने की सूचना है। कुलदीप की वोट कांग्रेस को नहीं मिली और बताया जाता है कि उन्‍होंने अपना वोट कार्तिके को दिया । कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल और राज्यसभा चुनाव में भाजपा के एजेंट संसदीय कार्य मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कुलदीप बिश्नोई द्वारा कांग्रेस को वोट नहीं दिए जाने की पुष्टि की है।  उन्हें भाजपा के नौ, जजपा के 10, छह निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ  इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला व हलोपा विधायक गोपाल कांडा का भी वोट मिला। एक वोट कृष्णलाल पंवार को मिले वोट में से ट्रोसफर हुआ।  

महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने किसी भी उम्मीदवार को यह कहते हुए अपना वोट नहीं दिया कि भाजपा ने किसान आंदोलन के दौरान अपनी जिम्मेदारी का ठीक ढंग से निर्वाह नहीं किया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन बाहरी थे। कुंडू इस चुनाव में गैर हाजिर रहे।

राज्य विधानसभा में विधायकों की संख्या 90 है, लेकिन बलराज कुंडू द्वारा वोट नहीं दिये जाने व एक वोट रद होने के कारण 88 वोट पोल हुये। कांग्रेस विधायक किरण चौधरी और बीबी बत्रा की वोट को लेकर विवाद पैदा हो गया था, जो देर रात पौने एक बजे तक चलता रहा।

निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा के लिए जजपा की ओर से चुनाव एजेंट बने दिग्विजय चौटाला ने आरोप लगाया कि किरण चौधरी व बीबी बत्रा ने अपनी पार्टी के एजेंट विकेक बंसल को वोट दिखाने के बाद उन्हें भी वोट दिखाया, जो कि राज्यसभा चुनाव के नियमों के खिलाफ है। इसलिए इन दोनों वोट को रद किया जाना चाहिए।

कार्तिकेय शर्मा ने किरण चौधरी व बीबी बत्रा की वोट पर एतराज जताया।

इस बात को लेकर मतदान केंद्र में ही रिटर्निंग अधिकारी आरके नांदल और दिग्विजय चौटाला में बहस हो गई। नांदल ने वीडियो फुटेज देखने के बाद कहा कि किरण व बत्रा के वोट फाउल नहीं हुए हैं। दिग्विजय का एतराज ठीक नहीं है। इस पर वहां माहौल गरम हो गया।

काफी देर की नोकझोंक के बाद भाजपा के घनश्याम दास अरोड़ा, जजपा के दिग्विजय चौटाला, कृष्णलाल पंवार और कार्तिकेय शर्मा की ओर से केंद्रीय चुनाव आयोग को शिकायत भेजी गई। नई दिल्ली में भाजपा के चार केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, गजेंद्र शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, डा. जितेंद्र सिंह व ओम पाठक शामिल केंद्रीय चुनाव आयोग से मिले और कांग्रेस की दोनों वोट रद करने की मांग की।

इसकी प्रतिक्रिया में कांग्रेस की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल, एमपी के पूर्व एडवोकेट जनरल विवेक तन्खा व रणजीत राजन ने केंद्रीय चुनाव आयोग से मुलाकात की। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, पूर्व सीएम व विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पी चिदंबरम, रणदीप सिंह सुरजेवाला व हरियाणा में चुनावों के अधिकृत एजेंट राजीव शुक्ला वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये इस बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े।

उन्होंने कहा कि भाजपा जान-बूझकर गिनती रुकवा रही है। रिटर्निंग अधिकारी अपना फैसला दे चुके हैं। फिर गिनती रोकने का कोई सवाल पैदा नहीं होना चाहिये। कार्तिकेय की तरह कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि सत्तारूढ़ दल अपनी हार देखकर साफ-सुथरे चुनाव के परिणाम को रुकवाने या टलवाने की कोशिश में लगा है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने रिटर्निंग अधिकारी आरके नांदल से उनका पक्ष जाना तथा वोटिंग की फुटेज मंगवाई। आरके नांदल ने लिखित में चुनाव आयोग को भेजा कि किरण चौधरी व बीबी बत्रा की वोट सही ढंग से पोल हुई है और उन्होंने पार्टी के अधिकृत एजेंट के अलावा किसी दूसरे को अपना वोट नहीं दिखाया है। इस दौरान पूरे समय काउंटिंग रुकी रही।

केंद्रीय चुनाव आयोग ने अपनी आंतरिक बैठक करने के बाद 12 बजकर 45 मिनट पर हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी अनुराग अग्रवाल को यह कहते हुए मतों की गणना शुरू कराने के आदेश दिए कि किरण चौधरी व बीबी बत्रा के वोट को वैध माना जाए। ठीक एक बजे वोटों की गिनती का काम चालू कर दिया गया था और सभी पार्टियों के एजेंट मौके पर मौजूद थे।

ऐसे शुरु हुआ किरण व बत्रा की वोटों का विवाद

विपक्ष के नेता भूपेंद्र हुड्डा की कोठी से किरण चौधरी सीधे विधानसभा पहुंच गई थी। चुनाव एजेंट होने के नाते आफताब अहमद व बीबी बत्रा वहां पहले से मौजूद थे। पहले बत्रा ने अपना वोट डाला और उनके बाद किरण चौधरी ने वोट डाला। नियमों के तहत दोनों को अपना वोट अधिकृत चुनाव एजेंट विवेक बंसल को दिखानी थी। अपनी-अपनी बारी में दोनों ने वोट बंसल को दिखाया।

तभी बंसल के साथ वाले कैबिन में बैठे जजपा एजेंट दिग्विजय चौटाला ने कहा कि किरण ने अपना वोट उन्हें दिखाया है। यही आरोप बीबी बत्रा के वोट को लेकर लगाए गये। जिस समय यह पूरा विवाद हुआ उस समय केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक राजेश अग्रवाल व हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग अग्रवाल भी पोलिंग स्टेशन में मौजूद थे।

यूं हुआ कांग्रेस के एक विधायक का वोट रद

बैलेट पेपर पर कांग्रेस अजय माकन के नाम के आगे (। )लगाना था, मगर एक विधायक अजय माकन के नाम के आगे (✔ ) का चिन्ह बना आए। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार यह चिन्ह वर्जित था। इस वजह से कांग्रेस का एक वोट रद हुआ। चूंकि वोट डालने से पहले इस विधायक ने बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट विवेक बंसल को दिखाया था, इसलिए इसमें विवेक बंसल की भी गलती रही कि वह यह गलती नहीं पकड़ पाए।

सवाल यह भी उठता है कि रायपुर में तीन दिन में चार बार कांग्रेस विधायकों ने वोट डालने की रिहर्सल की थी , फिर भी यह चूक हुई है तो इसे पार्टी स्तर पर विधायक की जानबूझकर की गई गलती माना जाएगा। विवेक बंसल भी ऐसे विधायक का नाम याद करके पार्टी नेतृत्व को बता सकते हैं।

Edited By: Sunil Kumar Jha