जेएनएन, चंडीगढ़। गुरुग्राम में बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्य में बिल्डरों द्वारा भूजल का इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने अब सभी पक्षों को आदेश दिया है कि वो इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा अभी तक जारी सभी आदेश की पालना पर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर करे।

चीफ जस्टिस रवि शंकर झा एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने वर्ष 2008 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैंं। यह याचिका वर्ष 2008 में दायर की गई थी,  जिस पर समय-समय पर हाई कोर्ट निर्देश जारी करता रहा, लेकिन किसी कारणवश इस याचिका पर वर्ष 2014 के बाद सुनवाई नहीं हो पाई। हाई कोर्ट ने अब केंद्र सरकार सहित हरियाणा सरकार, गुरुग्राम नगर निगम और अन्य सभी प्रतिवादी पक्षों को मामले की अगली सुनवाई पर भूजल की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दिए जाने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दायर किए जाने के आदेश दे दिए हैं। 

क्या था मामला

गुरुग्राम में बिल्डरों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे निर्माण में बोर वेल के जरिये भूजल के दुरूपयोग को लेकर हाई कोर्ट में वर्ष 2008 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। तब हाई कोर्ट ने सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था कि उनके पानी का स्रोत क्या है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने आदेश दिए थे कि जिस किसी ने भी बिना सरकार से अनुमति लिए भूजल जल को निर्माण कार्य में इस्तेमाल किया है वह इसे तत्काल बंद करे।

वर्ष 2014 के बाद इस याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई थी। अब यह याचिका दोबारा सुनवाई के लिए आई है तो चीफ जस्टिस ने इसे बेहद ही गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर केंद्र सरकार सहित राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादी पक्षों को स्टेटस रिपोर्ट दायर किए जाने के आदेश दे दिए हैं,  ताकि पता चल सके कि अब मौजूदा हालात कैसे हैंं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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